बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में
इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, होम साइंस और एमबीए विभागों में चल रहे
कोर्सेज में दाखिले के लिए कैंडिडेट्स के पास अब भी मौका है।
विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग सीटें बढ़ाकर अभ्यर्थियों के एडमिशन लेंगे।
विश्वविद्यालय में ओपन कैटेगरी की सीटें भरने और एससी-एसटी वर्ग की सीटें
खाली रहने के बाद सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को दाखिला देने के लिए बीच
का रास्ता निकाला गया है।
गुरुवार को हुई विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल
की बैठक में एससी-एसटी अभ्यर्थियों को जीरो फीस पर दाखिला देने सहित कई
बिंदुओं पर फैसला लिया गया।
बीबीएयू में इस
वर्ष हुई प्रवेश प्रक्रिया में एलएलबी सहित कई विभागों में सामान्य वर्ग की
सीटें तो भर गईं लेकिन एससी-एसटी वर्ग की सीटें खाली रह गई थीं। ऐसे में
एससी-एसटी वर्ग की सीटों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को दाखिला देने की
मांग की जा रही थी।
गुरुवार को एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस मुद्दे को
रखा गया। कुलपति प्रो. आरसी सोबती की अध्यक्षता में हुई बैठक में नियमों का
हवाला दिया गया और बताया गया कि विवि में 50 प्रतिशत सीटें अनुसूचित
जाति-जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित हैं।
विवि के नियम एससी-एसटी के
लिए आरक्षित सीटों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को दाखिले की अनुमति
नहीं देते। इसके बाद विभागाध्यक्षों को
अपने-अपने विभागों में जरूरत के हिसाब सीटें बढ़ाने का अधिकार दे दिया गया।
हालांकि, सीटें बढ़ाते समय इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि ओपन कैटेगरी
के साथ ही एससी-एसटी वर्ग की सीटें भी बढ़ानी होंगी। एससी-एसटी वर्ग की
सीटों पर दाखिला न होने की सूरत में वो खाली पड़ी रहेंगी।
विश्वविद्यालय के
प्रवक्ता डॉ. गोविंद पांडेय के अनुसार एकेडमिक काउंसिल के फैसले के बाद लॉ
डिपार्टमेंट ने सामान्य और एससी-एसटी वर्ग की 10-10 सीटें बढ़ा दी हैं।