यूपी की राजधानी लखनऊ में भवन और शिक्षक होने के बावजूद राजधानी के कई अनुदानित कॉलेजों का बुरा हाल है। राजधानी के कई अनुदानित विद्यालयों का ऐसा ही हाल है। हालत यह है कि इस इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा के लिए कई अनुदानित कॉलेजों से 12 परीक्षा फॉर्म भी नहीं भरे गए हैं।
हाईस्कूल के स्टूडेंट्स की हालत भी बहुत अच्छी नहीं हैं।
राजधानी में एक ओर निजी कॉलेज संचालक मान्यता लेने के लिए परेशान हैं। यहां तक कि गली-कूचों में चलने वाले बगैर मान्यता वाले कॉलेजों में भी हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं।
इसके बावजूद राजधानी के इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज में 10वीं में 10 और इंटरमीडिएट में सात, वैदिक कन्या गर्ल्स में हाईस्कूल में 16 और इंटरमीडिएट में 17, गांधी विद्यालय में हाईस्कूल में 4 और इंटर में 9, दुर्गा गीता हायर सेकेंड्री में 13, रेलवे हायर सेकेंड्री स्कूल में हाईस्कूल में 26, स्वतंत्र गर्ल्स इंटर कॉलेज में हाईस्कूल में 15 और इंटर में 12 और विद्यामंदिर गर्ल्स इंटर कॉलेज में हाईस्कूल में 17 परीक्षार्थी ही पंजीकृत हैं।
साल दर साल राजधानी के अनुदानित स्कूलों में छात्र संख्या घटती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी लापरवाही के साथ ही इसके लिए विद्यालय प्रबंधन और शिक्षक भी कम जिम्मेदार नहीं हैं।