हाईकोर्ट ने मेघालय स्थित महात्मा गांधी विश्वविद्यालय से कोलोब्रेशन के साथ चलाने का दावा करने वाले स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट को सभी डिग्री कोर्स में दाखिला करने पर रोक लगा दी।
अदालत ने कहा कि राजधानी में मान्यता प्राप्त न होने पर इस इंस्टीट्यूट में कैसे दाखिल कर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। कोर्ट ने यूजीसी से भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि मेघालय के उक्त विवि के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जब महात्मा गांधी विवि (मेघालय) मात्र मेघालय में कोर्स करवाने के लिए मान्यता प्राप्त है तो उससे जुड़े इंस्टीट्यूट दिल्ली में कैसे दाखिले दे सकते हैं। अदालत ने उक्त विश्वविद्यालय को भी निर्देश दिया कि वे दिल्ली के किसी भी बच्चे का दाखिला स्वीकार नहीं करेंगे।
अदालत गाजियाबाद यूपी निवासी छात्र मो. शाजिद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता सिताब अली चौधरी ने अदालत को बताया कि स्कूल ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट साउथ एक्स स्थित अंसल प्लाजा में चल रहा है।
उन्होंने कहा उक्त इंस्टीट्यूट में एमबीए, बीबीए, बीसीए, एमसीए व फैशन संबंधी कोर्स को चला रहा है। उनके मुवक्किल ने भी वर्ष 2012-14 सत्र के लिए इंटीरियर डिजाइनिंग कोर्स में दाखिला लिया व एक लाख रुपये से ज्यादा फीस अदा की।
उन्होंने कहा कि अब पता चला है कि यह इंस्टीट्यूट गैरकानूनी रूप से संचालित है और तथाकथित रूप से मंजूरी का तर्क देकर मासूम व गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।