राजधानी के प्राइवेट स्कूलों में मनमानी आम बात है। अभिभावकों को लूटने का उन्हें कोई न कोई बहाना चाहिए। ऐसे ही 2006 में आए छठे वेतन आयोग की आड़ में अभिभावकों से मनमानी फीस वसूल की और शिक्षकों को उस हिसाब वेतन नहीं दिया।
मामला सामने आया तो अनियमितता की जांच के लिए न्यायमूर्ति अनिल देव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई। व्यापक जांच के बाद कमेटी ने मामले में 80 स्कूलों को दोषी पाया है।
कमेटी ने इन स्कूलों को बढ़ाई गई फीस और छठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के नाम पर वसूली बकाया राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित अभिभावकों को वापस दिलाने की सिफारिश की है।
तो इतने स्कूल हैं घेरे में
इनमें से कई स्कूलों के खिलाफ तो दंडात्मक कार्रवाई की भी सिफारिश की गई है। इसी तरह 39 स्कूल ऐसे हैं, जिनके दस्तावेज गलत पाए गए हैं या अधूरे हैं।
कमेटी को कुल 1172 निजी स्कूलों के खातों की जांच करनी है। अब तक कुल 755 स्कूलों के खातों की जांच कर कुल 322 स्कूलों को दोषी पा चुकी है।
अभी भी 417 स्कूलों के खातों की जांच होनी है। कमेटी ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि इन सभी 80 स्कूलों को सितंबर 2008 से अब तक वसूली बढ़ी हुई फीस 9 प्रतिशत ब्याज के साथ अभिभावकों को वापस देने का निर्देश दिया जाए।
इतना ही नहीं, वेतन आयोग के नाम पर एक जनवरी 2006 से अगस्त 2008 की बकाया राशि के रूप में वसूली राशि भी ब्याज सहित वापस करवाने का आग्रह किया है। इसी तरह शैक्षिक सत्र 2010-11, 11-12 और 12-13 की मद में वसूली गई राशि भी वापस करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
ये हैं वो 80 स्कूल
कमेटी ने अपनी पांचवीं रिपोर्ट में जिन 80 स्कूलों को फीस वापस करने का आदेश करने की सिफारिश की है, उनमें से जेएम इंटरनेशनल स्कूल-द्वारका, बयानट्री पब्लिक स्कूल-लोधी रोड, माउंट कारमेल पब्लिक स्कूल-आनंद निकेतन, दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल-रोहिणी, भाई लालो पब्लिक स्कूल-गीता कॉलोनी, योग भारती पब्लिक स्कूल-न्यू आशोक नगर, जैन हैप्पी मॉडल स्कूल-भगत सिंह मार्ग, हैप्पी इंग्लिश स्कूल-गीता कॉलोनी प्रमुख हैं।