शिक्षा निदेशालय ने साफ कर दिया है कि स्कूल आर्थिक पिछड़े और वंचित वर्ग के तहत दाखिला लेेने वालों से वर्दी, किताबों के नाम पर पैसे की मांग नहीं कर सकते।
दरअसल, गरीब बच्चों के लिए सरकार की ओर से प्रति छात्र के हिसाब से स्कूलों को राशि का भुगतना किया जाता है। वहीं गरीब छात्रों के जो अभिभावक बीपीएल कार्ड, फूड सिक्योरिटी कार्ड, अंत्योदय अन्न योजना के अंतर्गत आते हैं, उनसे स्कूल आय प्रमाणपत्र नहीं मांग सकते हैं।
इसके साथ ही निजी स्कूलों में गरीब वर्ग के छात्रों का दाखिला तभी अंतिम माना जाएगा जब दस्तावेजी जांच में उनके सभी तथ्य सही पाए जाएंगे।
दस्तावेज की प्रामाणिकता की जांच होने तक उनका दाखिला अस्थायी माना जाएगा। दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर उनका प्रोविजनल दाखिला भी रद्द कर दिया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए स्कूलों को प्रोविजनल दाखिले का लिंक उपलब्ध करा दिया है।
आर्थिक रूप से पिछड़े और वंचित वर्ग के लिए शिक्षा निदेशालय ने इस बार केंद्रीकृत दाखिला प्रक्रिया लागू की है। इस प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चों के दाखिले के लिए ऑनलाइन लॉटरी निकाली गई। लॉटरी में सफल बच्चों की दाखिला प्रक्रिया जारी है।
स्कूलों को कहा गया है कि यदि किसी बच्चे के दस्तावेज की जांच लंबित है तो ऐसे में बच्चे को उन्हें प्रोविजनल दाखिला देना होगा। दरअसल बीते साल फर्जी दस्तावेज के आधार पर स्कूलों में दाखिले के मामले सामने आए थे।
दिशा-निर्देशों में साफ कर दिया गया है कि सभी जिला उपशिक्षा निदेशक गरीब वर्ग की शिकायतों का सही तरीके से निपटारा करें और कार्रवाई सुनिश्चित करें। इन दिशा-निर्देशों का स्कूलों को पालन करना होगा। पालन न करने पर इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
- डॉ. आशिमा जैन, अतिरिक्त शिक्षा निदेशक