पढ़ाई की तैयारियों को लेकर अक्सर स्टूडेंट्स तनाव में आ जाते हैं। इसका प्रभाव न सिर्फ उनके स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि तैयारी भी प्रभावित हो जाती है।
स्टूडेंट्स के इसी तनाव को खत्म करने के लिए सेकेंडरी बोर्ड ऑफ स्कूल एजूकेशन ने अपनी वेबसाइट पर ‘एग्जाम स्ट्रेस’ किताब अपलोड की है, जिसमें स्टूडेंट्स का खान-पान, पढ़ाई के तरीके आदि बताए गए हैं।
खास बात यह है कि किताब में अभिभावकों के लिए भी एग्जाम के समय बच्चों की केयरिंग पर सुझाव दिए गए हैं। किताब को एक्सप्रेशंस इंडिया नामक संस्था ने तैयार किया है।
इसमें संस्था के काउंसलर्स के मोबाइल नंबर भी दिए गए हैं। इसे बोर्ड की वेबसाइट से निशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है।
परीक्षा के तनाव से बचने के टिप्स दिए गए हैं। इसमें पहला भाग स्वस्थ दिनचर्या है। इसमें खान-पान, व्यायाम और नींद की आवश्यकता से संबंधित बातें हैं।
शोध का हवाला देते हुए बताया गया है कि जो स्टूडेंट्स खेलकूद या व्यायाम आदि करकेखुद को फिट रखते हैं, उनका प्रदर्शन परीक्षा में अच्छा रहता है।
स्टूडेंट्स को हफ्ते में तीन दिन कम से कम 15-15 मिनट साइकिलिंग और जॉगिंग, हफ्ते में एक दिन स्वीमिंग या कोई अन्य खेल खेलने की सलाह दी गई है।
मुख्य बाधक कम्प्यूटर गेम, मोटिवेशन का लो लेवल, जंक फूड से परहेज करने को कहा गया है। दूसरा भाग पढ़ने के तरीके पर आधारित है।
इसमें पढ़ने के टिप्स, समय प्रबंधन, टेक्स्ट पढ़ना, नोट्स बनाना, चीजों को याद रखना, भाषा संबंधी विषयों की तैयारी, गणित या विज्ञान की तैयारी आदि से संबंधित बातें बताई गई हैं।
जैसे किसी विषय को विभिन्न चीजों से रिलेट करके याद किया जा सकता है, कठिन विषयों को गीत से जोड़कर या किसी अन्य मशहूर शब्द या पंक्ति से जोड़कर याद रखना आसान है।
तीसरे भाग में परीक्षा से संबंधित योजना बनाने के बारे में बताया गया है। जैसे परीक्षा से कुछ हफ्ते पहले की तैयारी, कुछ दिन पहले क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
किताब में उन सवालों के जवाब दिए गए हैं, जो आमतौर पर परीक्षा के समय अभिभावकों के मन में आते हैं। जैसे परीक्षा के समय बच्चों की केयर कैसे करें। बच्चों की तैयारी में अभिभावक किस तरह सहायक हों।
किताब में बताया गया है कि पेरेंट्स बच्चों के साथ कुछ समय जरूर बिताएं। अनावश्यक दबाव की जगह आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास करें। दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
जबरदस्ती घंटों में बांधकर पढ़ाई नहीं करानी चाहिए, अगर बच्चा नर्वस है तो उसकी बात को अच्छे से सुनकर किसी काउंसलर की सहायता लेनी चाहिए आदि।
परीक्षा के समय अगर बच्चे के रहन-सहन, खान-पान, सोने के समय आदि मेंअचानक बदलाव दिखे तो उसे सामान्य नहीं समझना चाहिए। उसका कारण समझकर समाधान करने का प्रयास करना चाहिए।