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'क्यों नहीं शुरू होता डीडी संस्कृत चैनल'

Sun, 15 Sep 2013 10:45 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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कर्म करने से मानसिक शांति मिलती है। अनावश्यक तनाव नहीं होता और भटकाव की स्थिति से बचाव होता है। ये बातें वेंकटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय, तिरुपति के पूर्व कुलपति प्रो. सुदर्शन शर्मा ने कहीं।
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वे शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के दूसरे दिन ‘वैदिक औषधि विज्ञान’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वैदिक तरीकों से एड्स जैसी खतरनाक बीमारी का इलाज भी किया जा सकता है।

व्याख्यानमाला में प्रो. ओमप्रकाश उपाध्याय ‘संस्कृत आयुर्वेद तथा आधुनिक चिकित्सा शास्त्रम’ विषय पर कहा कि दुखों को दूर करने के तीन तरीकों का वर्णन आयुर्वेद में है जो दर्शनशास्त्र पर आधारित है। उन्होंने आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संबंधों पर बातचीत की।
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वहीं, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति व अर्थशास्त्री प्रो. एडीएन बाजपेयी ने कहा है कि देश में संस्कृत के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है कि यह सिर्फ एक वर्ग व वर्ण की भाषा है जबकि ऐसा नहीं है।

संस्थान के प्राचार्य प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने वेदों में प्रबंध विज्ञान के सूत्रों के बारे में बताया। इसके अतिरिक्त देर शाम राष्ट्रीय संस्कृत महाविद्यालय, भोपाल की ओर से ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ नाटक का मंचन किया गया।

पद्मश्री प्रो. रमाकांत शुक्ल ने ‘संचार माध्यमों में संस्कृत’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि गीता के सूत्रों का उच्चारण डीडी भारती व डीडी इंडिया के कई कार्यक्रमों से पहले किया जाता है।

ऐसे ही राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में मंचित नाटकों को प्रसारित किया जाता है लेकिन संस्कृत के लिए अलग से कोई चैनल नहीं है।

उन्होंने मांग की कि उर्दू की तरह दूरदर्शन का एक चैनल संस्कृत को समर्पित होना चाहिए। यानी डीडी संस्कृत। प्रथम सत्र के अंत में उन्होंने संस्कृत कविता सुनाई।
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