अक्सर दो अलग दलों के दिग्गज जब एक ही परियोजना को अपने खाते में लाने के लिए भिड़ते हैं, तो उसका ठंडे बस्ते में जाना लगभग तय होता है। लेकिन राज्य में सैनिक स्कूल घोड़ाखाल के बाद रुद्र प्रयाग के जखोली स्थान पर एक और सैनिक स्कूल के लिए रक्षा मंत्रालय से स्वीकृति लेने में भाजपा और कांग्रेस में चली प्रतिस्पर्धा का नतीजा पहाड़ के पक्ष में आया है।
सैन्य बहुल प्रदेश में दूसरे सैनिक स्कूल की पैरवी करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की कोशिशें उनके कार्यकाल में कामयाब नहीं हुईं, लेकिन अब सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह रावत के नए सिरे से प्रयास सफल हुए हैं।
सांसद बीसी खंडूड़ी ने स्कूल के लिए अनुमति मिलने को संसद सत्र में उठाने से लेकर रक्षा मंत्री से हुई वार्ता का नतीजा बताया है। उधर, भले भाजपा ने स्कूल की मांग पहले की थी, लेकिन उसके लिए अनिवार्य भूमि चयन से लेकर तमाम औपचारिकताएं पूरी करने में मंत्री हरक सिंह के प्रयास अहम रहे।
अब दोनों दलों के बीच इसका श्रेय लेने की होड़ रहेगी। फिलहाल सैनिक स्कूल जखोली के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय की सैनिक स्कूल संचालन सोसाइटी को वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। अब सोसाइटी और राज्य सरकार के बीच एमओयू साइन होगा जिसके तीन वर्ष के भीतर स्कूल का निर्माण हो जाएगा।