फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

स्कूली बच्चों को लेकर GMCH का चौंकाने वाला खुलासा

Mon, 28 Jul 2014 01:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
बच्चों में नेत्रदोष बढ़ता जा रहा है। खासकर स्कूली बच्चों में। चंडीगढ़ के 30.4 प्रतिशत स्कूली बच्चों में नेत्र दोष पाया गया है। सबसे ज्यादा नेत्र दोष प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों में मिला है।
विज्ञापन


उम्र बढ़ने के साथ मर्ज भी बढ़ता जा रहा है। यह सब जीएमसीएच-32 की एक स्टडी में सामने आया है। स्टडी ने आगाह किया है कि कास्मेटिक की वजह से कई स्टूडेंट चश्मा लगाने से गुरेज करते हैं।

ऐसे में स्कूल टीचर को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। टीचर को भी आंख से संबंधित कॉमन बीमारियों के बारे में ट्रेंड करना होगा, ताकि वे बच्चों की दिक्कतों को समझ सकें और उन्हें अवेयर कर पाए।
विज्ञापन


क्लास में बैठे बच्चों की बीमारियों की पहचान कर उन्हें आई विशेषज्ञ के पास भेजे। शोधकर्ता बताते हैं कि समय-समय पर ऐसे सर्वे होने चाहिए, ताकि बच्चों के नेत्र दोष को रोका जा सके।

ज्यादातर बच्चे रिफे‌क्टिव एरर से पीड़ित

स्टडी में यह भी पता चला कि सबसे ज्यादा बच्चे रिफेक्टिव एरर (नजर में फर्क आना) से पीड़ित हैं। 30.4 में से 29.3 प्रतिशत बच्चों की नजरों में फर्क पाया गया। गवर्नमेंट स्कूलों के मुकाबले प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों में रिफेक्टिव एरर की समस्या ज्यादा पाई गई है।

कलर ब्लाइंडनेस के भी कई केस देखने को मिले हैं। लड़कों में कलर ब्लाइंडनेस का प्रीवलेंस सबसे ज्यादा पाया गया है। विटामिन ए की कमी से आंखों में मर्ज सिर्फ 0.005 प्रतिशत बच्चों में पाया गया। एलर्जी कंजेक्टिवाइटिस का मर्ज 0.4 प्रतिशत पाया गया है।

स्टडी में 9067 बच्चे शामिल
स्टडी में 9067 स्कूली बच्चों को शामिल किया गया है। इसमें सरकारी स्कूल के 6,620 बच्चे शामिल थे। इनमें 3,282 लड़कियां व 3,338 लड़के थे, जबकि प्राइवेट स्कूल के 2,447 बच्चों को शामिल किया गया है।

इसमें 1,167 लड़कियां व 1,280 लड़कों थे। स्टडी में छह से 16 साल के उम्र के स्कूली बच्चों को शामिल किया गया था। सबसे ज्यादा संख्या 10-13 साल की उम्र के बच्चों की थी।

नेत्रदोष के प्रमुख कारण

1. किताबों व कंप्यूटर को नजदीक से पढ़ना
2. ग्लास न लगाना
3. रेगुलर आंखों का चेकअप नहीं कराना
4. खान-पान का ध्यान नहीं रखना
5. दोष होने पर डाक्टरों के पास नहीं जाना

किस मर्ज से कितने बच्चे प्रभावित
मर्ज---------------------स्टूडेंट----------प्रतिशत
रिफेक्टिव एरर------------2,654----------29.3
कलर ब्लाइंडनेस-----------107-----------1.2
भेंगापन--------------------76------------0.8
एलर्जिक कंजेक्टिवाइटिस----40------------0.4
विटामिन ए की कमी---------5------------0.05
विज्ञापन

किस टाइप के स्कूलों में नेत्र दोष

दोष---------------गर्वमेंट-------प्राइवेट-------कुल
ओवरआल दोष-----1,811--------947-------2758 (30.4 प्रतिशत)
रिफेक्टिव एरर------1,721--------933-------2654  (29.3 प्रतिशत)
कलर ब्लाइंडनेस------71----------36--------107  (1.2 प्रतिशत)
भेंगापन--------------60----------16---------76 (0.8 प्रतिशत)

किस उम्र में नेत्र दोष
दोष----------------6-9 (एज)-----10-13-------14-16
ओवरआल दोष----------806-------1006----------946
रिफेक्टिव एरर-----------768--------967-----------919
कलर ब्लाइंडनेस----------16--------49--------------42
भेंगापन-------------------30--------30--------------16
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें