लखनऊ विश्वविद्यालय में स्नातक कक्षाओं में दाखिले के लिए शासन, प्रशासन और नेताओं से पैरवी करवाने वालों की लंबी कतारे हैं।
स्नातक कक्षाओं में दाखिले के प्रवेश समन्वयक प्रो. प्रवीण नागर ने इस तरह के सभी पत्रों को प्रवेश समिति की बैठक में रख दिया।
इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय से भी स्टूडेंट्स को दाखिला देने के लिए पत्र आए हैं।
कुलपति डॉ. एसबी निमसे की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय किया गया कि अगर स्नातक कक्षाओं में दाखिले के लिए सीटें खाली बचती हैं तो फिर इन सभी के दाखिले पर विचार होगा।
दाखिले उपलब्ध सीटों पर मेरिट के अनुसार होंगे।
एलयू में सोमवार को हुई प्रवेश समिति की बैठक में मुख्य एजेंडे के बिंदु संख्या पांच में शैक्षिक सत्र 2014-15 के प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए तीन स्टूडेंट्स के मामले रखे गए।
इसमें बीएससी बॉयो, बीएससी मैथ्स व बीकॉम में दाखिले के लिए इन्होंने रसूखदारों से पैरवी करवाई है। उनके पत्र भी इस बैठक में रखे गए।
इसके अलावा प्रवेश समिति के सप्लीमेंट्री एजेंडे में बिंदु संख्या 11 में करीब 20 स्टूडेंट्स के प्रार्थना पत्र रखे गए, जिन्होंने शासन अधिकारियों या फिर नेताओं व मंत्री से पत्र लिखवाकर भेजे हैं।
इनमें से कई ऐसे भी हैं जो दाखिले के लिए बार-बार फोन भी करवा रहे हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन से प्रवेश समन्वयक ने इन सभी मामले में विचार करने के लिए प्रवेश समिति में यह मुद्दा रखा।
अभी एलयू में 70 प्रतिशत सीटें ही भरी हैं। करीब 30 प्रतिशत सीटें खाली चल रही हैं। प्रवेश समिति की बैठक में इसकी जानकारी दी गई।
फिलहाल, यूनिवर्सिटी प्रशासन सीटें खाली रहने पर इन्हें दाखिले के लिए विचार करेगा। उसमें भी पैरवी करवाने वालों की मेरिट देखी जाएगी।