बेहतर
भविष्य की आस में दूर-दराज के इलाकों से राजधानी के गोविंद बल्लभ पंत
पॉलीटेक्निक में पढ़ने आए स्टूडेंट्स खुद कोक ठगा-सा महसूस कर रहे हैं।
जिस
तकनीकी और व्यावहारिक ज्ञान की तलाश में वे यहां आए थे, उसे तो
जिम्मेदारों ने ताले में बंद कर रखा है। यहां के वर्कशॉप पर ताले लटकते
रहते हैं। छात्र आते हैं और बिना प्रैक्टिकल ही लौट जाते हैं।
कई वर्कशॉप
तो ऐसी हैं जहां पिछले पांच साल से ताले लगे हैं। जीबी पंत पॉलीटेक्निक में
इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है। इस वर्ष
करीब 120 छात्रों ने यहां एडमिशन लिया है।
समाज कल्याण विभाग की ओर से
संचालित इस कॉलेज के कारपेंट्री शॉप, पैटर्न शॉप, फाउंड्री शॉप सहित कई
वर्कशॉप वर्षों से बंद पड़े हैं। जानकारों की मानें तो यहां वेल्डिंग शॉप
के प्रशिक्षक रहे साकिर हुसैन पांच साल पहले रिटायर हो गए। उसके बाद न कोई
भर्ती हुई और न वर्कशॉप खुली।
यही हाल विद्युत शॉप का है। यहां दास गुप्ता
के रिटायर होने के 13 साल बीत गए पर कोई नियुक्ति नहीं की गई। मशीन शॉप में
किसी भी चीज में चूड़ी बनाना सिखाया जाता है लेकिन 12 साल पहले रिटायर हुए
एतशाम अली के बाद कोई नियुक्ति नहीं की गई।
स्टूडेंट्स कॉलेज तो आते हैं
प्रशिक्षक न होने की वजह से बिना प्रैक्टिकल किए ही वापस चले जाते हैं।
रखरखाव की कमी के चलते कॉलेज कैंपस सांप-बिच्छू का अड्डा भी बन गया है।
कैंपस में खेलने के मैदान से लेकर चारों ओर लंबी-लंबी झाड़ियां हैं।
छात्रों की मानें तो यहां कई बार दिन में भी सांप नजर आते हैं। प्रिंसिपल
केके श्रीवास्तव के अनुसार कुछ वर्कशॉप में ही काम नहीं हो रहा है। अन्य
में स्थिति सामान्य है। इसके अलावा उन्होंने बजट न होने के कारण मैदान की
सफाई न होने का हवाला दिया।