राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त और वृंदावन लाल वर्मा का उपन्यास ‘झांसी की रानी’ लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी के सिलेबस में बने रहेंगे।
शनिवार को फैकल्टी बोर्ड ने हिंदी विभाग की बोर्ड ऑफ स्टडीज से पास प्रस्तावित सिलेबस को खारिज कर दिया।
फैकल्टी बोर्ड के अनुसार सत्र शुरू होने के दो महीने बाद सिलेबस बदलना सही नहीं है। बदलाव तभी होने चाहिए जब विभाग के सभी शिक्षक इसके लिए सहमत हों।
लविवि का शैक्षिक सत्र 16 जुलाई से शुरू हो चुका है। इसके बावजूद विवि के हिंदी विभाग में सिलेबस बदलने की प्रक्रिया चल रही थी। बोर्ड ऑफ स्टडीज ने प्रस्तावित सिलेबस को मंजूरी भी दे दी थी।
हालांकि, विभाग में ही शिक्षकों के एक गुट ने ज्यादातर शिक्षकों की अनुपस्थिति में बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाने का आरोप लगाया है।
सिलेबस में बदलाव का विरोध करने वाले शिक्षक राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, महादेवी वर्मा और आचार्य रामचंद्र शुक्ल जैसे महान रचनाकारों को हटाने और प्रस्तावित नए रचनाकारों के नाम पर भी खफा थे। बदलाव पर साहित्यकारों में भी काफी मतभेद थे।
यहां तक कि सिलेबस में बदलाव का मामला विधानसभा में भी उठा था। शिक्षकों की आपत्ति इस बात पर भी थी कि सत्र शुरू होने के दो महीने बाद सिलेबस बदलना ठीक नहीं है। वहीं, शिक्षकों का दूसरा वर्ग बदलाव को समय की मांग बता रहा था।
विभाग के शिक्षकों में टकराव को देखते हुए फैकल्टी बोर्ड बैठक से दो दिन पहले प्रति कुलपति प्रो. एके सेनगुप्ता की अध्यक्षता में भी एक बैठक हुई जिसमें शिक्षकों के बीच तीखी बहस हुई थी।
शनिवार को कला संकाय की डीन प्रो. रश्मि पांडेय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भी काफी गहमा-गहमी हुई। आखिर में बोर्ड ने सिलेबस बदलने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। फैकल्टी बोर्ड के अनुसार बदलाव का विरोध नहीं है पर इसके लिए न तो सही समय चुना गया और ना ही सही प्रक्रिया।
शिक्षकों की खींचतान भुगतेंगे छात्र
शैक्षिक सत्र शुरू होने के दो महीने पांच दिन बाद साफ हो गया कि छात्रों को पुराना सिलेबस ही पढ़ना है। प्रस्तावित बदलाव से बेखबर कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो गई थी पर लविवि के हिंदी विभाग में कक्षाएं शुरू नहीं हुई थीं।
स्नातक स्तर पर कम से कम 180 दिन और पीजी लेवल पर कम से कम 90 दिन कक्षाएं चलाने की अनिवार्यता है।
स्नातक में वार्षिक प्रणाली के कारण भले ही कक्षाएं पूरी हो जाएं लेकिन दिसंबर के प्रथम सप्ताह से प्रस्तावित सेमेस्टर परीक्षाओं से पहले 90 दिन की कक्षाएं चलाना संभव नहीं होगा।
हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. कालीचरण सनेही के अनुसार एडमिशन प्रक्रिया में देरी के कारण विश्वविद्यालय के किसी विभाग में पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई हैं। 20 दिन का नुकसान हुआ है जिसे अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर पूरा कर लिया जाएगा।