सूबे में प्रदेश विश्वविद्यालय ने छात्रों को विषय के बाहर से प्रश्न डालकर उनके होश उड़ा दिए है। पहले छात्रों को जहां परीक्षा परिणाम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, वहीं अब जिन छात्रों का मुख्य विषय संस्कृत है, उन्हें सिलेबस से बाहर के प्रश्न डालकर प्रदेश विवि ने सकते में डाल दिया है।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने कॉलेज प्राचार्य को लिखित शिकायत सौंपी है। उन्हें चिंता सता रही है कि अगर अगले प्रश्न पत्र भी ऐसे ही आए तो उनके भविष्य का क्या होगा। इन दिनों कॉलजों में रूसा के तहत पहले और तीसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं चल रही हैं। प्रदेश विश्वविद्यालय ने छात्रों को विषय के बाहर से प्रश्न डालकर उनके होश उड़ा दिए है।
तीसरे सेमेस्टर की वंदना, शकुंतला, लक्ष्मी पहले सेमेस्टर की नीलम, अनिता तथा हीरामणि आदि ने बताया कि शास्त्री प्रथम और तीसरे सत्र के व्याकरण विषय में पूछे गए सभी प्रश्न सिलेबस के बाहर से पूछे गए हैं। शास्त्री के प्रथम सत्र में संधियों को नहीं दर्शाया गया है, जबकि तृतीय सत्र के व्याकरण विषय में छात्रों भ्वादिगण से बाहर अन्य गणों से प्रश्न पूछे गए हैं। इस कारण छात्रों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है।
छात्रों का कहना है कि अगली परीक्षा में भी इस प्रकार के प्रश्न पूछे गए तो वे कैसे परीक्षा पास कर पाएंगे? छात्रों ने विश्वविद्यालय से मांग की है कि विषय के बाहर से पूछे गए प्रश्नों के कृपांक दिए जाएं। उधर, परीक्षा अधीक्षक दीपा शर्मा ने बताया कि छात्रों की ओर से उनके पास अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। अगर आएगी तो इस बारे में प्रदेश विश्वविद्यालय को बता दिया जाएगा।
उधर, इस बारे में प्रदेश विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि इस बारे में अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है। मामले की जांच की जाएगी। विशेषज्ञ कमेटी से राय लेने के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
एसएफआई ने प्रश्नपत्र के फॉर्मेट पर उठाए सवाल
विश्वविद्यालय में मंगलवार को हुई मैनेजमेंट इकोनोमिक्स के प्रश्नपत्र के फॉर्मेट पर विवि की एसएफआई इकाई ने ऐतराज जताया है। एसएफआई के परिसर सह सचिव नोवल ठाकुर का कहना है कि विश्वविद्यालय में परीक्षाओं के दौरान एक डिपार्टमेंट के लिए एक ही प्रश्नपत्र तैयार किया जाता था, लेकिन मंगलवार को आयोजित परीक्षा में दो अलग-अलग प्रकार के प्रश्नपत्र जारी किए गए।
रेगुलर और आईसीडीओएल के लिए भिन्न प्रश्न पत्र दिए गए। इतना ही नहीं, प्रश्नपत्र में कुछ प्रश्न ओल्ड सिलेबस से पूछे गए थे। इस कारण छात्रों को परेशानी हुई। एसएफआई ने इसे विश्वविद्यालय प्रबंधन की लापरवाही करार दिया है और मामले की जांच कर लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।