पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के कुलपति और सिंडीकेट के बीच चल रहे टकराव के कारण यूनिवर्सिटी के काम प्रभावित होने लगे हैं। पिछले तीन महीने में सिर्फ एक ही सिंडीकेट की बैठक हुई है।
5 दिसंबर को होने वाली सिंडीकेट बैठक में सिर्फ तीन मुद्दों को ही शामिल किया गया है। कुछ ऐसे मुद्दे भी थे जो जो सिंडीकेट से पास कराने जरूरी थी, लेकिन वे बैठक के एजेंडा में ही शामिल नहीं किए गए।
फीस बढ़ोतरी के मामले पर भी बैठक में चर्चा नहीं होगी। कुलपति ने संकेत दे दिए हैं कि वे अहम मुद्दों को अब जनवरी में नई सिंडीकेट के समक्ष ही रखेंगे। माना जा रहा है कि नई सिंडीकेट मौजूदा सिंडीकेट से बिलकुल अलग होगी।
पीयू में हर महीने सिंडीकेट बैठक बुलाने का कोई नियम नहीं है। लेकिन, पीयू में कई सालों से प्रथा रही है कि जून को छोड़कर हर महीने सिंडीकेट की बैठक होती है।
सितंबर में सदस्यों के बहिष्कार कर देने के कारण सिंडीकेट की बैठक नहीं हो सकी थी। सितंबर की बैठक का एजेंडा 8 अक्तूबर को सिंडीकेट की बैठक में रखा गया।
इसके बाद न तो अक्तूबर की सिंडीकेट की बैठक हुई और न ही नवंबर की। 5 दिसंबर को होने वाली बैठक के एजेंडे में तीन आइटम हैं।
इनमें पांच सीनेट सदस्यों को फैकल्टी अलॉट करना, प्रो. गुरदयाल सिंह को डीलिट की मानद डिग्री देना और कुछ छात्रों को पीएचडी की डिग्री की मंजूरी देना शामिल है। ऐसे में सितंबर से नवंबर तक सिंडीकेट की एक ही बैठक हुई।
सिंडीकेट ने ये काम अटकाए
सिंडीकेट की 8 अक्तूबर को हुई बैठक में सिंडीकेट ने कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर की पत्नी प्रो. नीरा ग्रोवर की संगीत विभाग में हुई नियुक्ति को एक साल की एक्सटेंशन देने की मंजूरी नहीं दी थी।
लोक प्रशासन विभाग और यूसोल में चार सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति को बिना किसी कारण के मंजूरी देने से इंकार कर दिया था। सिंडीकेट के इन दो फैसलों ने वीसी को काफी आहत किया।
इसके बाद वीसी ने सिंडीकेट की बैठक नहीं बुलाई। अब सीनेट की 8 दिसंबर को होने वाली बैठक में इन दोनों मुद्दों को इंफॉरमेशन के लिए लाया जा रहा है।
पीएम और चांसलर से शिकायत
पीयू के लोक प्रशासन विषय में चयनित हुईं चार सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति बिना किसी कारण रद करने का मामला प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और पीयू के कुलाधिपति और उप-राष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी के पास पहुंच गया है।
सिंडीकेट के इस फैसले से इन चार उम्मीदवारों का भविष्य खराब हो गया है। इन उम्मीदवारों से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और पीयू के चांसलर को पत्र भेजकर इस पूरे मामले की शिकायत की है।