असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए आवेदन करने वाले 724 में से 389 अभ्यर्थियों के आवेदन उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने निरस्त कर दिए हैं।
मिले थे 724 आवेदन
इनमें से आधे अभ्यर्थी पीएचडी रेगुलेशन-2009 का प्रमाणपत्र ही उपलब्ध नहीं करा पाए।समाजशास्त्र और जंतु विज्ञान विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए राज्य लोक सेवा आयोग को 724 आवेदन मिले थे।
इनमें से 410 आवेदन समाजशास्त्र और 314 आवेदन जंतु विज्ञान विषय के थे। आयोग ने जांच की तो कुल आवेदनों में से आधे से ज्यादा निरस्त हो गए। आयोग ने 389 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए योग्य नहीं पाया।
इनमें से करीब आधे ऐसे हैं, जिन्हांने रेगुलेशन-2009 के अनुसार पीएचडी होने का प्रमाणपत्र आयोग में जमा नहीं कराया। बाकी अभ्यर्थियों के आवेदन योग्यता पूरी नहीं होने, अंक प्रतिशत कम होने और अन्य प्रमाणपत्र संलग्न नहीं किए जाने के चलते निरस्त किए गए।
आयोग सचिव एसएन पांडेय ने बताया कि अर्ह और अनर्ह अभ्यर्थियों की सूची जारी कर दी गई है।
जंतु विज्ञान में 75 प्रतिशत आवेदन रद
जंतु विज्ञान विषय में करीब 75 प्रतिशत आवेदन निरस्त हुए हैं। आयोग के पास इस विषय के 314 आवेदन आए थे। इनमें से 234 निरस्त हो गए हैं।
केवल 80 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है। समाजशास्त्र विषय में 410 अभ्यर्थियों में से 155 के आवेदन रद हुए हैं।
यह है यूजीसी रेगुलेशन-2009
यूजीसी की ओर से असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए तय मानकनुसार अभ्यर्थी को नेट क्वालीफाई होना चाहिए। उन अभ्यर्थियों को नेट में छूट प्रदान की जाती है, जिन्होंने पीएचडी यूजीसी रेगुलेशन-2009 के अनुरूप की है। अभ्यर्थियों को संबंधित विवि से इसका प्रमाणपत्र देना होता है।