शहर के कालेजों में बीकॉम के पहले वर्ष दाखिला मिलना आसान नहीं होता है, लेकिन दूसरे और तीसरे वर्ष कॉलेज अपनी मनमर्जी से किसी को भी दाखिला दे देते हैं। बीकॉम के पहले वर्ष करीब 40 फीसदी विद्यार्थियों फेल हो जाते हैं, जिससे हर कालेज में दूसरे वर्ष कुछ सीटें खाली हो जाती हैं। इसी तरह दूसरे वर्ष में भी कई विद्यार्थी फेल हो जाते हैं, जिससे तीसरे वर्ष कुछ सीटें खाली हो जाती हैं।
शहर के अधिकतर कालेज दूसरे और तीसरे वर्ष की खाली सीटों पर दाखिले के लिए आवेदन आमंत्रित नहीं करते हैं। यही वजह है कि अब पहले वर्ष की तरह ही दूसरे और तीसरे वर्ष भी बीकॉम में केंद्रीयकृत प्रवेश देने की मांग उठने लगी है। इस बारे में अंतिम फैसला अब पंजाब यूनिवर्सिटी को लेना है।
शहर के कालेजों में बीकॉम के पहले वर्ष में केंद्रीयकृत दाखिला होता है और छात्रों से ऑनलाइन आवेदन मंगवाकर ऑनलाइन ही मेरिट सूची तैयार होती है। इसके बाद उन्हें उनकी पसंद के अनुसार कालेज में ऑनलाइन सीट अलॉट हो जाती है। इससे पहले वर्ष में दाखिले में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहती है।
कालेजों के हाथ में एक भी सीट पर दाखिले का अधिकार नहीं होता है। लेकिन, दूसरे और तीसरे वर्ष दाखिले का अधिकार कालेजों के पास होने से दाखिले में कालेज अपनी मनमर्जी करते हैं। इस पर पीयू का कोई नियंत्रण नहीं होता है। पहले वर्ष में पत्राचार से बीकॉम करने वाले छात्र अगर दूसरे या तीसरे वर्ष में कालेज में दाखिला लेते हैं तो उन्हें डिग्री रेगुलर छात्र की ही मिलती है।
इस वर्ष 55.6 फीसदी रहा रिजल्ट
इस साल बीकॉम के पहले वर्ष की परीक्षा में 10,850 विद्यार्थी बैठे थे और इनमें से सिर्फ 6026 विद्यार्थी पास हुए। परिणाम 55.6 फीसदी रहा। ऐसे में 4824 विद्यार्थी दूसरे वर्ष में दाखिले के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए। हालांकि, इनमें से कुछ छात्रों के पुनर्मूल्यांकन के बाद पास होने की उम्मीद है।
लेकिन, इसके बाद भी चंडीगढ़ और पंजाब के कालेजों में बीकॉम के दूसरे वर्ष में 4 हजार से ज्यादा सीटें खाली होंगी। बीकॉम के दूसरे वर्ष में 8276 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे थे, जिनमें से 6150 ही परीक्षा में पास हुए। 2126 विद्यार्थी तीसरे वर्ष में दाखिले के लिए क्वालीफाई न कर पाए।
छात्र खुद करते हैं आवेदन
शहर के कालेजों में बीकॉम की खाली सीटों पर दाखिले के लिए छात्र अपने स्तर पर आवेदन कर देते हैं। कालेज इन खाली सीटों के लिए आवेदन नहीं मांगता है। इससे बहुत से छात्रों को खाली सीटों पर दाखिले की जानकारी नहीं मिल पाती है। जिन छात्रों को पहले वर्ष में किसी कालेज में दाखिला नहीं मिला पाता है वह कालेजों में खुद जाकर आवेदन कर देते हैं। कुछ प्राइवेट कालेज तो छात्रों से दाखिले के लिए मोटी फीस भी लेते हैं। इसी तरह से तीसरे वर्ष में भी खाली सीटों पर दाखिला दिया जाता है। छात्रों का कहना है कि कालेजों को आवेदन मंगवाने के बाद ही दाखिला देना चाहिए।
पंजाब यूनिवर्सिटी अगर चाहे तो दूसरे और तीसरे वर्ष में केंद्रीयकृत प्रवेश शुरू कर सकती है। लेकिन, हमारे कालेज में ऐसा नहीं होता है। हम दूसरे और तीसरे वर्ष की खाली सीटों के लिए आवेदन मंगवाने के बाद ही मेरिट पर दाखिला देते हैं।
- डॉ.बीसी जोसन, प्रिंसिपल डीएवी कालेज-10
यह सही है कि दूसरे और तीसरे वर्ष में खाली सीटों पर दाखिले का अधिकार कालेजों के पास होता है। लेकिन, कालेजों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। केंद्रीयकृत प्रवेश की प्रक्रिया लंबी होती है। पीयू चाहे तो इस बारे में फैसला ले सकती है।
- डॉ.आरके गुप्ता, संयोजक, बीकॉम एडमिशंस