निजी औद्यागिक प्रशिक्षण संस्थान अब स्टूडेंट्स से मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे। अब सभी निजी आईटीआई की अधिकतम फीस निर्धारित कर दी गई है।
अगर आईटीआई निर्धारित फीस से ज्यादा वसूली करते हुए पाए गए तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश के निजी आईटीआई की अधिकतम फीस निर्धारण के लिए डायरक्टरेट जनरल एंप्लॉयबल एंड ट्रेनिंग (डीजीईटी) ने राज्य सरकारों को दिशा- निर्देश जारी कर दिए हैं।
उम्मीद है कि जल्द ही अधिकतम फीस का निर्धारण कर दिया जाएगा।
अभी तक राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की फीस निर्धारित है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में स्टूडेंट्स से सालाना केवल 40 रुपये फीस वसूली जाती है।
दूसरी ओर, निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की फीस के संबंध में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हैं। ऐसे में निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान मनमानी फीस वसूल करते हैं।
कई बार एक ही औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में ही स्टूडेंट्स से फीस की अलग-अलग राशि वसूलने की शिकायतें भी आती हैं।
इस स्थिति से निपटने के लिए डीजीईटी ने वर्किंग कमेटी का गठन किया था।
वर्किंग कमेटी ने आईटीआई की दशा सुधारने के लिए कई सुझाव दिए थे। इनमें से फीस की अधिकतम राशि का निर्धारण भी शामिल है।
डीजीईटी आलोक कुमार ने सुझावों को मानते हुए इसको अमल में लाने के लिए निर्देश जारी कर दिया है।
आचार संहिता समाप्त होने के बाद निजी आईटीआई की फीस निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
ग्रेडिंग के आधार पर तय होगी फीस
निजी आईटीआई की फीस निर्धारित करने से पहले सभी निजी आईटीआई की ग्रेडिंग की जाएगी। ग्रेडिंग के आधार पर ही निजी आईटीआई की फीस निर्धारित की जाएगी।
ग्रेडिंग का आधार आईटीआई में पढ़ाए जा रहे ट्रेड के आधार पर होगा। इसके बाद किसी भी आईटीआई के लिए अधिकतम फीस का निर्धारण किया जाएगा।
इस प्रकार निर्धारित फीस से ज्यादा किसी राशि किसी भी आईटीआई के लिए वसूलना मना होगा।
बीएड जैसा न हो हाल
आईटीआई से पहले इंजीनियरिंग कॉलेज और बीएड शिक्षण संस्थानों के लिए प्रदेश में अधिकतम राशि निर्धारित करने का प्रावधान है।
इंजीनियरिंग कॉलेज में पहले से ही स्टूडेंट्स का टोटा रहने के कारण कॉलेजों की मनमानी की शिकायत नहीं आती।
वहीं दूसरी ओर, बीएड संस्थानों के लिए अधिकतम फीस राशि निर्धारित होने के बावजूद अलग-अलग मदों में फीस वसूलने की शिकायतें आती रहती हैं।
कॉलेज पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण मनमानी बढ़ती जा रही है।
आईटीआई में भी अधिकतम फीस निर्धारित की जा रही है। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि बीएड जैसा हाल आईटीआई का भी न हो।