बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर नगर केंद्रीय विश्वविद्यालय में पीएचडी दाखिलों में नया विवाद खड़ा हो गया है।
पीएचडी के एडमिशन होने के बाद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में बिना आवेदन लिए ही सिंगल गर्ल चाइल्ड कोटे में एक छात्रा का एडमिशन कराने की तैयारी है।
इससे पहले डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी (डीआरसी) कमेटी के गलत गठन और मेरिट लिस्ट की अनियमितता को लेकर गणित विभाग के पीएचडी दाखिलों में विश्वविद्यालय की फजीहत हो चुकी है।
अब पत्रकारिता एवं जनसंचार में कुछ वैसी ही कहानी दोहराई जा रही है। बीबीएयू के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में शैक्षिक सत्र 2014-15 में पीएचडी में दाखिले के लिए विभाग ने छह सीटों पर आवेदन मांगे थे।
छह सीटों में से तीन ओपन और तीन रिजर्व कैटेगरी की थीं। आवेदन मांगते समय विवि ने सिंगल गर्ल चाइल्ड के लिए अलग से सीट घोषित नहीं थी। आवेदन के बाद अगस्त में काउंसलिंग भी हो गई।
इसके बाद आपात बैठक बुलाकर विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसलिंग में पीएचडी में सिंगल गर्ल चाइल्ड को दाखिला देने का प्रस्ताव पास किया गया।
सामान्य परिस्थितियों में काउंसलिंग प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद एकेडमिक काउंसलिंग के फैसले अगले शैक्षिक सत्र के दाखिलों पर लागू होते हैं। इसके बावजूद पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में इस नियम का पालन नहीं किया गया।
प्रवेश प्रक्रिया में चुने अभ्यर्थियों के दाखिले हो चुके हैं। इस वर्ष पीएचडी में दाखिला पाए सभी अभ्यर्थियों की क्लास भी शुरू हो चुकी है।
अब एक अभ्यर्थी को सिंगल गर्ल चाइल्ड कोटे के तहत मंगलवार को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है। तर्क दिया गया है कि जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, उनमें एक ही छात्रा सिंगल गर्ल चाइल्ड थी।
अब सवाल उठता है कि जिन छह सीटों पर दाखिले के लिए फॉर्म मांगे गए थे, उन पर दाखिले हो चुके हैं, ऐसे में बिना आवेदन मांगे सिंगल गर्ल चाइल्ड कोटे में किसी को दाखिला कैसे दिया जा सकता है।
बहरहाल्र, कुलपति ने मामला जानकारी में न होने की बात कही है। उनके अनुसार बिना आवेदन मांगे दाखिले नहीं होने चाहिए। ऐसा करने की सूरत में दाखिले को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
बीबीएयू में पीएचडी दाखिलों में विवाद का यह पहला मौका नहीं है। पिछले सप्ताह गणित विभाग में नियमों को दरकिनार करके साक्षात्कार आयोजित होने जा रहे थे।
दाखिले के लिए गठित डीआरसी में एससी एसटी वर्ग के एसोसिएट प्रोफेसर स्तर के शिक्षक के बजाय असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर के शिक्षक को शामिल कर दिया गया था। इंटरव्यू के लिए स्टूडेंट्स को भारांक जोड़कर बुलाया गया था।
अमर उजाला द्वारा इसका भंडाफोड़ करने पर गणित विभाग में नए सिरे से डीआरसी का गठन करके नियमानुसार एडमिशन करने के लिए फिलहाल प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है।