देहरादून के डीएवी कॉलेज में वाट्स एप से हुए पेपर लीक मामले में अब कॉलेज प्रशासन ही घिरता नजर आ रहा है। यह कॉलेज पहला ऐसा कॉलेज बन गया है, जो कि एक प्रवेश परीक्षा में लीक हुए पेपर की सबूतों सहित खबर मीडिया में सामने आने के बावजूद जांच में आनाकानी कर रहा है।
कॉलेज प्रशासन की ओर से तीन दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक जांच की दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ाया जा सका है। डीएवी में 18 अगस्त को लॉ की प्रवेश परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे के बाद ही पेपर ‘वाट्स एप’ से बाहर आ गया था।
अमर उजाला ने सभी सबूतों के साथ मामला प्रकाशित किया। पहले दिन से ही कॉलेज प्रशासन मामले पर ढीला रवैया अपनाए हुए है। तमाम पाबंदियों के बावजूद मीडिया में प्रश्न पत्र के फोटो प्रकाशित होने के बावजूद प्रशासन ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर रोक या जांच की जहमत नहीं उठाई।
छात्र नेताओं ने घेराव किया तो कॉलेज स्तर या एसएसपी से जांच के बजाए सीधे डीजीपी को छात्रों द्वारा दी गई लिखित शिकायत पर जांच का पेच कॉलेज फंसा दिया।
सबसे पहला सवाल तो यह उठ रहा है कि यदि प्रश्न-पत्र की फोटो बाहर आई थी तो कॉलेज प्रशासन को अपनी निष्पक्षता दिखाने के लिए रिजल्ट प्रक्रिया पर रोक लगाकर जांच शुरू करनी चाहिए थी, लेकिन प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन ने लिखित शिकायत का बहाना बना लिया।
दूसरे दिन छात्रसंघ महासचिव नितिन चौहान ने लिखित शिकायत कर मामले की जांच की मांग की, लेकिन कॉलेज प्रशासन आनाकानी कर रहा है।
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