काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं फरवरी 2016 के अंतिम सप्ताह में शुरू होने जा रही हैं। काउंसिल की परीक्षाओं में 12वीं में देशभर से 72002 छात्रों में से केवल एक छात्र संस्कृत की परीक्षा देगा।
जबकि लेप्चा, थाई, किशवाहिली और स्पेनिश में भी देशभर में एक-एक छात्र ही परीक्षा देंगे। हालांकि, 10वीं में संस्कृत भाषा वाले छात्रों की संख्या 433 है। सीआईएससीई की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक 26 फरवरी से 12वीं (आईएससी) और 29 फरवरी से 10वीं (आईसीएसई) की परीक्षाएं होनी हैं।
इसमें कुल 2,31,578 छात्रों में से 10वीं के 1,59,576 और 12वीं के 72,002 छात्र शामिल हैं। 10वीं में कुल 99 विषयों के लिए छात्र परीक्षा देंगे। सबसे ज्यादा छात्र अंग्रेजी (159539) के हैं।
हिंदी, अंग्रेजी जैसी भाषाओं में करियर के विकल्प ज्यादा
सबसे कम छात्र भाषा इंडोनेशिया, स्पेनिश और जर्मन (1-1) होंगे। संस्कृत विषय की परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या देशभर में 433 है। दूसरी ओर, 12वीं में 84 विषयों के लिए परीक्षा होगी। इसमें सबसे ज्यादा छात्र अंग्रेजी (70780) के लिए हैं।
भाषा के विषयों में रुझान कम
आईसीएसई और आईएससी की परीक्षाओं में छात्रों का रुझान लैंग्वेज सब्जेक्ट में खासकर हिंदी और अंग्रेजी पर ही ज्यादा होता है। संस्कृत भाषा के प्रति कम रुझान के बारे में विशेषज्ञ प्रो. वीए बौड़ाई कहते हैं कि हिंदी या अंग्रेजी जैसी भाषाओं में युवा करियर के विकल्प ज्यादा मानते हैं।
लिहाजा इन भाषाओं पर अधिक फोकस करते हैं। जबकि संस्कृत और दूसरी भाषाएं करियर के लिहाज से उतनी उपयोगी नहीं साबित होती हैं।