एमबीए, एमसीए व एमएएम में दाखिले के लिए राज्य प्रवेश परीक्षा रविवार को होगी। इसके लिए प्रदेश भर में 60 ऑनलाइन परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।
इन तीनों कोर्स में कुल 15 हजार स्टूडेंट परीक्षा देंगे।
राजधानी में ऑनलाइन एडमिशन टेस्ट के लिए करीब 10 केंद्र बनाए गए हैं और इसमें लगभग 2,500 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे।
परीक्षा का आयोजन करवा रहे यूपीटीयू ने परीक्षा में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए खास इंतजाम किए गए हैं।
एसईई के समन्वयक प्रो. जगवीर सिंह ने बताया कि परीक्षा के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
जिन 500 संदिग्ध स्टूडेंट्स के प्रवेश पत्र संदेह के कारण रोके गए थे, उनमें से कई स्टूडेंट दोबारा जांच में ठीक पाए गए हैं।
क्रॉस चेकिंग के बाद नए प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए हैं। वहीं, कई स्टूडेंट प्रवेश पत्र बनवाने नहीं आए हैं।
फिलहाल, ऑनलाइन एडमिशन टेस्ट देने आ रहे स्टूडेंट की फोटो, हस्ताक्षर और थंब इंप्रेशन की जांच कई चरणों में करवाई जा रही है।
जितने भी स्टूडेंट परीक्षा दे रहे हैं, उन्हें सख्त निर्देश दिया गया है कि वे परीक्षा के लिए निर्धारित समय से करीब दो घंटे पहले अपने सेंटर पर रिपोर्ट करें।
ऑनलाइन एडमिशन टेस्ट का शड्यूल
एग्जाम-समय
एप्टीट्यूट टेस्ट फॉर एमसीए-सुबह आठ से 10 बजे तक
एप्टीट्यूट टेस्ट फॉर एमसीए-दोपहर 12 से दो बजे तक
(सेकंड ईयर लेट्रल इंट्री)
एप्टीट्यूट टेस्ट फॉर एमबीए-शाम चार से छह बजे तक
एप्टीट्यूट टेस्ट फॉर एमएएम-शाम चार से छह बजे तक
फिर स्टूडेंट्स को तरसेंगे एमबीए कोर्स चलाने वाले कॉलेज
उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) से संबद्ध इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में एमबीए, एमसीए व एमएएम कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले सभी स्टूडेंट बिना किसी कॉम्प्टिशन के दाखिला पा जाएंगे।
इन तीनों कोर्स में कुल 51,170 सीटें हैं और इसके मुकाबले महज 15,000 स्टूडेंट्स ने ही दाखिले के लिए आवेदन किया है।
ऐसे में कुल सीटों के मुकाबले केवल 25 प्रतिशत स्टूडेंट ही मैदान में हैं, ऐसे में इन कोर्स में दाखिला लेने के लिए बिल्कुल मारामारी नहीं रहेगी।
ऑनलाइन एडमिशन टेस्ट देने आ रहे स्टूडेंट की सीट तो पक्की है। बीते साल भी कॉलेजों में एमबीए व एमसीए कोर्सेज में दाखिले के लिए बहुत कम आवेदन आए थे।
ऐसे में बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में स्टूडेंट का आकाल देखने को मिला।
करीब 200 कॉलेज तो ऐसे थे, जिनका खाता तक नहीं खुला था। इस बार भी ऐसी ही तस्वीर देखने को मिल रही है।
दरअसल, फीस अधिक और गुणवत्तापरक शिक्षा न होने के कारण अच्छा प्लेसमेंट नहीं हो पा रहा है। मंदी के दौर में इन कॉलेजों की हालत खराब हुई तो यह दोबारा ऊबर नहीं पा रहे हैं।