प्रदेश के पुस्तकालय अब ऑनलाइन होंगे। यही नहीं लाइब्रेरियां ऑनलाइन होने के साथ ही आपस में जुड़ेंगी। इससे छात्रों को तमाम पुस्तकें एक क्लिक पर पढ़ने को मिलेगी। इस दिशा में कवायद शुरू हो गई। वीरवार को प्रदेश विश्वविद्यालय में 10वां अंतरराष्ट्रीय कैलिबर-2015 का शुभारंभ इसी कवायद का एक हिस्सा है।
कैलिबर-2015 के आयोजन का विषय आधुनिक तकनीक से पुस्तकालय प्रबंधन और रखरखाव है। वीरवार को विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने इसका शुभारंभ किया। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, प्रदेश विवि शिमला और इनफ्लिबनेट गांधी नगर के संयुक्त तत्वाधान में कैलिबर का आयोजन किया जा रहा है।
विवि सभागार में ट्यूटोरियल सेशन था। इसमें देश और विदेशों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि प्रदेश विवि को इनफ्लिबिनेट गांधीनगर ने पुस्तकालयों के संचालन, रखरखाव और सूचनाओं के आदान-प्रदान विषय पर सम्मेलन के आयोजन के लिए चुना है।
इससे गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य होंगे और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल संभव होगा। कुलपति ने कहा कि नई तकनीकों से कोई भी शोधार्थी अथवा सूचना का जिज्ञासु इंटरनेट के माध्यम से ई-पुस्तकालयों से सूचनाएं प्राप्त कर सकता है। हर शोध का पता और उसकी जानकारी लोग इंटरनेट के माध्यम से जुड़े पुस्तकालयों में उपलब्ध सामग्री से प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम आयोजन के सचिव प्रो. पीके आहलुवालिया ने अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर विवि के प्रति-कुलपति प्रो.राजेंद्र सिंह चौहान, डीएस प्रो.टीसी भल्ला, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के पुस्तकालयाध्यक्ष डा. प्रेम चंद सहित अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, निदेशक और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।
तीन हजार कॉलेजों को आपस में जोड़ना लक्ष्य- इनफ्लिबिनेट गांधीनगर के निदेशक डा. जगदीश अरोड़ा ने कहा कि यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर अपने अपडेट कर संचार प्रणाली विकसित करनी होगी। ई पुस्तकालयों में अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त कुछ अन्य भाषाओं में भी पुस्तकें उपलब्ध हैं।
अलग-अलग भाषाओं में प्रकाशित शोध प्रबंध मुहैया करवाए हैं। ई पुस्तकालयों से उपलब्ध सूचनाओं एवं शोधसार ग्रहण की योजना तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और उससे संबद्ध 3000 महाविद्यालयों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
इससे सूचनाओं का भंडार तैयार होगा। सम्मेलन का मकसद सूचना तकनीकी विशेषज्ञों के साथ प्राध्यापकों और शोध छात्रों को भी यूनिवर्सिटी एक दूसरे से जोड़कर सूचनाओं का आदान प्रदान करने को तैयार करना है।