मध्य प्रदेश और कर्नाटक के नर्सिंग संस्थानों से डिग्री लेने वाले उत्तराखंड के सैकड़ों छात्र-छात्राओं की डिग्री संदेह के घेरे में है।
ऐसे छात्र-छात्राओं पर काउंसिल की नजर है। स्टेट नर्सिंग काउंसिल ने नर्सिंग काउंसिल ऑफ इंडिया (एनसीआई) और संबंधित राज्यों की काउंसिल को पत्र भेजकर इस संबंध में जानकारी मांगी है। एनसीआई ने इन छात्रों को क्लीनचिट नहीं दी है।
नर्सिंग के छात्रों को जरनल नर्सिंग मिडवाइफ (जीएनएम) में डिप्लोमा के साथ ही किसी राज्य की नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण करवाना अनिवार्य होता है। मई में परिणामों की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण के लिए स्टेट नर्सिंग काउंसिल में आवेदन किया।
इनमें बड़ी संख्या में वह छात्र-छात्राएं भी शामिल हैं, जिन्होंने मध्य प्रदेश और कर्नाटक के संस्थानों से डिग्री ली है। इन डिग्रियों पर संदेह होने के बाद स्टेट नर्सिंग काउंसिल ने आईएनसी और संबंधित राज्य की काउंसिल को सत्यापन के लिए पत्र लिखा। उनसे डिप्लोमा करने वाले सभी छात्रों के संबंध में जानकारी मांगी गई, जिससे प्रदेश में आवेदन करने वालों का मिलान किया जा सके।
नंबर 80 फीसदी से ज्यादा
मध्य प्रदेश और कर्नाटक से डिग्री हासिल करने वाले जिन छात्र-छात्राओं पर संदेह है, उनमें से ज्यादातर के 80 फीसदी से ज्यादा अंक हैं। सूत्रों के अनुसार, इन छात्र-छात्राओं पर संदेह इसलिए गहराया, क्योंकि पंजीकरण के वक्त वह सामान्य प्रश्नों के जवाब तक नहीं दे पाए। विषय की बिल्कुल भी समझ नहीं होने और बहुत अधिक अंक होने पर उन पर शक गहराया।
क्यों गए दूसरे राज्य?
प्रदेश में नर्सिंग की काफी सीटें होने के बावजूद यह छात्र दूसरे प्रदेशों में पढ़ने क्यों गए? यह सवाल भी अधिकारियों के दिमाग में कौंध रहा है। इनमें से ज्यादातर छात्र प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों से हैं। सवाल उठ रहा है कि ऐसा क्या कारण रहा कि प्रदेश से ही डिग्री लेने के बजाय उन्होंने दूसरे राज्यों का रुख किया।
गिरोह दिला रहा डिग्रियां
पूरे मामले में किसी गिरोह के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है। अधिकतर स्थानों से 10-12 या उससे अधिक के समूह में छात्र-छात्राओं ने डिग्री ली है। ऐसे में संदेह जताया जा रहा है कि किसी गिरोह ने उन्हें डिग्री दिलाई होगी।
उत्तरकाशी में फर्जी कॉलेज
इस मामले में पहले ही उत्तरकाशी में फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने का खुलासा हो चुका है। यह मामला सामने आने के बाद ही स्टेट नर्सिंग काउंसिल सतर्क हुई थी। हालांकि पूरा मामला अब ठंडे बस्ते में डाला जा चुका है।
सत्यापन के लिए आईएनसी और संबंधित स्टेट की काउंसिल को पत्र लिखा गया है। वहां से अभी छात्र-छात्राओं का सत्यापन नहीं हुआ है। सत्यापन होने के बाद इन छात्रों का पंजीकरण किया जाएगा।
- हंसी नेगी, रजिस्ट्रार, स्टेट नर्सिंग काउंसिल