परिषदीय स्कूलों की दशा सुधारने के लिए शासन ने ठोस कदम उठाया है। स्कूलों से किनारा कसने वाले व शिक्षण कार्य में रुचि न लेने वाले अध्यापकों की अब कुंडली तैयार की जाएगी। गुरुजनों की पोल कोई और नहीं अब वहां पढ़ रहे बच्चे ही खोलेंगे। शासन के निर्देश पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ने जिले के चयनित चार ब्लाकों के लिए टीमें गठित कर सर्वे का कार्य शुरू करा दिया है।
परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार कई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन शासन की मंशा पर ये स्कूल खरे नहीं उतर रहें हैं। परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए शासन ने अब ठोस कदम उठाया है।
प्रथम चरण में जिले के चार विकास खंड का चयन किया गया है। इन चार ब्लाकों में करनैलगंज, बेलसर, छपिया व बभनजोत शामिल हैं। इन ब्लाकों के परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा पांच व कक्षा आठ में पढ़ने 3400 छात्र-छात्राओं से निर्धारित प्ररूप के आधार पर प्रशभन पूंछे जाएंगे। बच्चों द्वारा दिए गए उत्तरों की रिर्पोट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।
सर्वे में ये है व्यवस्था
चयनित चार ब्लाकों के परिषदीय विद्यालयों का सर्वे करने के लिए यहां जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान ने टीमें गठित किया है। ये टीमें क्षेत्र के स्कूलों में जा कर कक्षा पांच व आठ के छात्र-छात्राओं से शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रारूप व प्रशभन पत्र के आधार पर सवाल जवाब करेंगे। बच्चों द्वारा बताए गए उत्तरों को प्रारूप पर भर कर टीम के सदस्य पूरा ब्योरा डायट को उपलब्ध कराएंगे।
शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रारूप में विद्यालयों के अध्यापकों के बारे में सवाल होंगे जिनका जवाब बच्चे देंगे। बताया जाता है बच्चों से उनके विद्यालयों के अध्यापकों के बारे में जाना जाएगा कि कौन देर आता है, कौन पढ़ाता है और हाजिरी लगा कर चला जाता है।
किस अध्यापक के पढ़ाने की विधि अच्छी है और किस विधा से बच्चों को पढ़ाया जाए जिससे उन्हें समझ में आ सके आदि ब्यौरा तैयार किया जाएगा। कक्षा पांच व आठ के बच्चों से हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित व सामाजिक विषय से सवाल पूंछे जाएंगे।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान दर्जीकुंआ के प्राचार्य मनोहर लाल ने बताया कि शासन के निर्देश पर चार ब्लाकों के परिषदीय स्कूलों के सर्वे के लिए टीमें गठित कर दी गईं है। टीमों द्वारा लाए सर्वे रिपोर्ट को शासन को भेजा जाएगा। इस सर्वे रिपोर्ट से शिक्षा में कितना सुधार हुआ और कहां कमी है इसका पता तो चलेगा ही साथ अध्यापकों की कार्यशैली की रिपोर्ट भी शासन तक पहुंच जाएगी। इससे लापरवाह अध्यापकों पर कार्रवाई तय हो सकेगी।