घर में रद्दी, प्लास्टिक, कांच की बोतलें आदि कबाड़ पड़ा है तो अब आप उसे ऑनलाइन बेच सकते हैं।
देहरादून में पढ़ने वाले दो छात्रों ने एक ऐसी वेबसाइट बनाई है, जिसके जरिये आप घर बैठे कबाड़ बेच सकेंगे। इसके लिए आपको कबाड़ी को ढूंढने की जरूरत नहीं होगी। वेबसाइट पर डिटेल्स भरने के तीन घंटे के भीतर आपके घर पर कबाड़ खरीदने वाला पहुंच जाएगा। इस वेबसाइट की लांचिंग के तीन दिन में ही इस पर 700 से ज्यादा लोग हिट कर चुके हैं।
डीआईटी यूनिवर्सिटी में बीटेक कंप्यूटर साइंस द्वितीय वर्ष के छात्र मोहनीश भारद्वाज और आशीष यादव ने बताया कि वेबसाइट बनाना तो आसान था लेकिन इस पर लोगों को जोड़ना और यहां आने वाली रिक्वेस्ट के हिसाब से कबाड़ बिकवाना सबसे बड़ी चुनौती था।
बताया कि जैसे ही यूनिवर्सिटी से मौका मिलता हम दोनों वेबसाइट के लिए वेंडर तलाशने निकल पड़ते। कबाड़ियों से बात हुई तो उन्हें भी यह आइडिया पसंद आया। तीन दिन के भीतर ही काम चल निकला। बताया कि वेबसाइट पर हिट करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई लोगों ने अपने घर का सामान बेचने की रिक्वेस्ट भी डाल दी है और उनके वेंडर ने खरीद भी लिया है।
ऐसा आया आइडिया
मोहनीश और आशीष ने बताया कि जब वे एक बार हॉस्टल का रूम बदल रहे थे तो उनके पास ढेर सारा कबाड़ था। इसे न तो यहां से ले जाकर बेच सकते थे और न उपयोग कर सकते थे। उस कबाड़ को वहीं छोड़कर चले तो गए लेकिन इस समस्या के समाधान के बारे में सोचने लगे।
आइडिया आया कि क्यों न ऐसा नेटवर्क तैयार किया जाए, जिससे न केवल छात्र-छात्राएं बल्कि आम लोगों के लिए भी घर बैठे ही कबाड़ बेचना आसान हो जाए। इसके एक महीने बाद ही वेबसाइट बना दी।
इन दामों पर बिकेगा कबाड़
न्यूज पेपर 10 रुपए प्रति किलो, किताबें नौ रुपए प्रति किलो, प्लास्टिक 12 रुपए प्रति किलो, एल्युमीनियम 50 रुपए प्रति किलो, बोतल एक रुपया प्रति बोतल, लोहे का कचरा 20 रुपए प्रति किलो, कार्डबॉक्स 9 रुपए प्रति किलो।
समय के साथ बढ़ेंगे दाम
मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं के बिसोली निवासी मोहनीश भारद्वाज और लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी खीरी निवासी आशीष यादव का कहना कि समय के साथ ही इस कबाड़ की प्राइज लिस्ट भी अपडेट होती रहेगी। बताया कि उनका मकसद इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से रि-साइक्लिंग को बढ़ावा देने के साथ ही भविष्य में इसे कमाई का जरिया भी बनाना है।
ये है वेबसाइट : www.kabaada.com