लखनऊ यूनिवर्सिटी में योग और प्राकृतिक चिकित्सा की पढ़ाई बिना रेग्युलर
विभाग के ही चल रही है।
इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
मंगलवार को यूपी नेचुरोपैथी एंड योग टीचर्स एंड फिजीशियंस एसोसिएशन के
‘21वीं शताब्दी में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा का महत्व’ पर सेमिनार में
यह मामला राज्यमंत्री डॉ. शिव प्रताप सिंह के सामने आया।
मंत्री ने विभाग
की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मसौदा आयोजकों से मांगा है।
एलयू
के सेमिनार में प्रतिनिधित्व कर रहे विभागाध्यक्ष प्रो. आरके शर्मा ने कहा
कि योग और नेचुरोपैथी को अब वैज्ञानिक तरीके से डॉक्यूमेंटेशन किए जाने की
जरूरत है।
इसके उलट एलयू में चल रहा विभाग बिना किसी रेग्युलर स्टाफ के
संचालित हो रहा है। विभाग के रेग्युलर नहीं होने से पढ़ाई की गुणवत्ता और
शोधकार्य दोनों ही प्रभावित हो रहे हैं।
अगर यूपी सरकार इसे रेग्युलर विभाग
की संसाधन उपलब्ध कराए तो काफी मदद मिल सकती है। उन्होंने मांग की कि
सेंटर फॉर एक्सीलेंस योजना में यह मदद की जा सकती है।
कार्यक्रम
में मुख्य अतिथि राज्यमंत्री शिव प्रताप सिंह यादव ने कहा कि एसोसिएशन
इसके लिए एक मसौदा बनाकर दे। इसे मुख्यमंत्री के सामने ले जाकर
लागू कराने की कोशिश की जाएगी।
वहीं, अध्यक्षता कर रहे पूर्व राज्यपाल
माता प्रसाद ने योग को बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया।
कार्यक्रम में
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमरजीत यादव, पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट दिल्ली के
प्रो. राजेंद्र प्रसाद, एलयू के पूर्व पीवीसी प्रो. सुरेंद्र सिंह मौजूद
रहे।