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आरटीई के नियमों को ठेंगा दिखा रहे केंद्रीय विद्यालय

Sat, 17 Aug 2013 01:37 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा का अधिकार (आरटीई) देने की प्रक्रिया में अपनाई गई जरूरी पारदर्शिता स्कूलों में दम तोड़ती नजर आ रही है। केंद्र सरकार के संस्थान ही इसका मखौल उड़ा रहे हैं।
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आलम ये है कि निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम में सख्त प्रावधान के बावजूद राजधानी के केंद्रीय विद्यालय आरटीई के तहत लिए गए दाखिलों की जानकारी सार्वजनिक करने से कतरा रहे हैं।

अब तक दस में से सिर्फ तीन केंद्रीय विद्यालयों ने ही अपनी वेबसाइट पर इन सूचनाओं को सार्वजनिक किया है।

राजधानी में 10 केंद्रीय विद्यालय हैं। तीन स्कूलों में सेकंड शिफ्ट में भी क्लासेज चलती हैं। केंद्र सरकार के संस्थान होने के चलते निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा अधिनियम-2005 यहां काफी पहले से लागू है।
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कुल उपलब्ध सीटों में से 25 प्रतिशत सीटों को गरीब वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित किया जाता है।

प्रिंसिपल इन पर दाखिले लेकर केंद्र को सूचनाएं भेजते हैं जिससे बच्चों की फीस, किताबें और ट्रांसपोर्टेशन की प्रतिपूर्ति की जा सके।

नियम के अनुसार पहली कक्षा में होने वाले एडमिशन की सभी सूचनाएं स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर देनी जरूरी हैं। इसके बावजूद राजधानी के केंद्रीय विद्यालयों के संचालक ये सूचनाएं देने से कतरा रहे हैं।

नहीं बताया कितनों के आवेदन निरस्त
केंद्रीय विद्यालय गोमती नगर में दो शिफ्ट में स्कूल चलता है। यहां पहली कक्षा की पहली शिफ्ट में 193 और सेकंड शिफ्ट में 69 बच्चों के दाखिले लिए गए हैं।

स्कूल ने ये सूचनाएं तो सार्वजनिक कर दी हैं लेकिन किन बच्चों को आरटीआई के तहत दाखिले मिले हैं, किन बच्चों के आवेदन निरस्त किए गए हैं, ये सूचनाएं स्कूल की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं हैं।

इसी तरह केंद्रीय विद्यालय एसजीपीजीआई में वर्तमान शैक्षिक सत्र में पहली क्लास में 37 बच्चों के दाखिले लिए गए हैं।

इस स्कूल ने शैक्षिक सत्र 2010-2011 में दाखिला लेने वाले बच्चों की सूचनाएं सार्वजनिक कीं लेकिन इसके बाद से कोई सूचना उपलब्ध नहीं है।

केंद्रीय विद्यालय एएमसी में दो शिफ्ट में संचालित स्कूल में 225 बच्चे हैं। यहां शैक्षिक सत्र 2012-13 की सूचनाएं सार्वजनिक की गई हैं। कुछ ऐसा ही बुरा हाल केंद्रीय विद्यालय सीआरपीएफ और केंद्रीय विद्यालय मेमौरा का भी है।

नहीं आया कोई छात्र
केंद्रीय विद्यालय लखनऊ कैंट में वर्तमान शैक्षिक सत्र में 25 प्रतिशत आरक्षण के दायरे में एक भी जरूरतमंद छात्र का आवेदन नहीं मिला।

प्रिंसिपल आरएम नवीन की मानें तो उन्होंने लंबे समय तक आवेदनों का इंतजार किया फिर बाद में प्रक्रिया को स्थगित कर दिया। जानकारों की मानें तो आर्मी कैंट में होने के कारण गरीब बच्चे यहां तक नहीं पहुंच पाते।

क्या कहता है नियम
निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम को लागू करने में स्कूल से लेकर विभागीय स्तर पर पारदर्शिता बरतने के स्पष्ट प्रावधान हैं।

इनके तहत आरटीई के दायरे में दाखिला लेने वाले बच्चों की सूचनाएं सार्वजनिक करनी हैं। अभिभावकों की ओर से प्रस्तुत आवेदन-पत्र के आधार पर आवेदनकर्ता का पूरा विवरण (नाम, पता, लिंग, जाति, श्रेणी, जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, वार्षिक आय का विवरण) शामिल होगा।
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स्कूल इस सूचना को अपने नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर लगातार प्रदर्शित करेंगे। आवेदन-पत्र निरस्त करने की स्थिति में स्कूलों को इसके कारण भी बताने होंगे।
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