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ठंडे बस्ते में लविवि की कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल

Sat, 30 Nov 2013 09:37 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
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एलयू ने कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल का गठन तो कर दिया लेकिन अभी तक वह कॉलेजों का कोई भला नहीं कर पा रही है।
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करीब साढ़े तीन महीने पहले इस काउंसिल की बैठक हुई और उसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए लेकिन वे सब जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।

क्योंकि दोबारा बैठक की नौबत ही नहीं आ रही। नवंबर में प्रस्तावित बैठक को अब अगले महीने के लिए टाल दिया गया है।

कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल (सीडीसी) का गठन एलयू प्रशासन ने इसलिए किया था कि इसके माध्यम से कॉलेजों की विभिन्न समस्याओं का आसानी से एक ही जगह पर समाधान हो जाएगा।

मगर काउंसिल अभी औपचारिकताओं में भी उलझी हुई है। काउंसिल ने तीन महीने पहले जो निर्णय लिए थे उन्हें ही अभी तक लागू नहीं किया जा सका है।

इसमें कॉलेज स्टूडेंट्स के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह हुआ था कि उनकी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज होंगी और उसका समाधान किया जाएगा।

इसके लिए सीडीसी ने कॉलेज के एक वरिष्ठ टीचर को शिकायत निवारण कमेटी में शामिल किया गया। वहीं कॉलेजों को विकास के लिए ग्रांट दिलाने और उनको रिसर्च आदि में मदद करने में भी सीडीसी अपना योगदान देगी।
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इसके अलावा कॉलेजों के मान्यता, परीक्षा व प्रवेश से संबंधित जो काम होंगे उसमें भी यह कमेटी मदद करेगी। आलम यह है कि अगस्त के दूसरे हफ्ते में एक बैठक हुई थी। उसमें कॉलेजों के प्राचार्यों को आमंत्रित किया गया था। लेकिन दूसरी बैठक की नौबत तक नहीं आई।

नवंबर के आखिरी हफ्ते में होने वाली बैठक को भी टाल दिया गया है। केकेसी के प्राचार्य डॉ. एसडी शर्मा ने बताया कि बीते अगस्त में सीडीसी की बैठक में तमाम निर्णय कॉलेज के पक्ष में हुए थे। उसके बाद से अभी तक कोई बैठक नहीं हुई है।

उधर कॉलीचरण पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. देवेन्द्र सिंह ने बताया कि पिछली बैठक में तमाम निर्णय हुए थे लेकिन उसके बाद कोई खास काम नहीं हुआ। सीडीसी ठीक से काम करे तो कॉलेजों की समस्याओं का चुटकी में समाधान हो जाए।
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लॉगइन व पासवर्ड तक नहीं मिला
कॉलेजों को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने लॉगिन व पासवर्ड देने का फैसला किया था। इसके तहत उन्हें यूनिवर्सिटी के महत्वपूर्ण आदेश सीधे ईमेल के जरिए मिल जाएंगे।

यही नहीं कॉलेजों व यूनिवर्सिटी के बीच इसके माध्यम से सीधे सूचनाओं का आदान प्रदान होता। लेकिन अभी तक उन्हें लॉगइन व पासवर्ड नहीं मिला है।

अभी तो आदेश जारी होने के कई दिन बाद जब मैनुअल आदेश पहुंचता है तो उन्हें जानकारी मिल पाती है।

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