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डीपीएमआर में चलेंगे ये नए ग्रेजुएशन कोर्स

Tue, 03 Dec 2013 11:14 AM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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केजीएमयू के डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबलिटेशन (डीपीएमआर) नि:शक्तों के पुनर्वास से संबंधित नर्सिंग व फिजियोथेरेपी के पाठ्यक्रम शुरू करेगा।
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यह जानकारी सोमवार को प्रेस कान्फ्रेंस में विभाग के हेड प्रो. आरएन श्रीवास्तव ने दी।
प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि डीपीएमआर विभाग नि:शक्तजनों को सस्ते एवं गुणवत्ता वाले कृत्रिम अंग बनाकर देने वाला प्रदेश का एकमात्र विभाग है।

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जयपुर, दिल्ली, कोलकाता और मुंबई के संस्थानों की तरह ही वहां भी विश्वस्तरीय कृत्रिम अंग बनाए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि जल्दी ही यहां बैचलर इन फिजियोथेरेपी, मास्टर इन फिजियोथेरेपी, बैचलर इन ऑक्युपेशनल थेरेपी, मास्टर इन आक्युपेशलन थेरेपी, बैचलर इन प्रोस्थेटिक, आर्थोटिक, मास्टर इन प्रोस्थेटिक एंड आर्थोपैडिक व बैचलर इन रिहैबिलिटेशन नर्सिंग के पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

इस तरह के पाठ्यक्रम शुरू होने से नि:शक्तों के पुनर्वास के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार हो सकेगा।

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प्रो. श्रीवास्तव ने बताया कि नि:शक्तजन दिवस पर मंगलवार को लिंब सेंटर में जरूरतमंदों को कृत्रिम अंग, व्हील चेयर, बैसाखी बांटे जाएंगे। इसके अलावा वहां भर्ती नि:शक्तजनों के लिए खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। लिंब सेंटर के वर्कशॉप इंचार्ज अरविंद निगम ने बताया कि विभाग में 25 तरह के कृत्रिम अंगों का निर्माण किया जाता हैं।
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वर्ष में जरूरतमंदों को लगभग 350 कृत्रिम अंग और 7500 सहायक उपकरण बनाकर दिए जाते हैं।

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