राजधानी में नेशनल पीजी कॉलेज ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से ए ग्रेड प्राप्त हासिल किया है। शनिवार को नैक की ओर से सूची जारी करने के बाद कॉलेज में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
नैक की ओर से ए ग्रेड पाने वाला यह राजधानी का पहला स्वायत्त व सहायता प्र्राप्त कॉलेज है। उत्तर प्रदेश में भी जो तीन स्वायत्त कॉलेज हैं, उनमें नेशनल पीजी कॉलेज सबसे ऊपर है।
बाकी दोनों कॉलेजों ने अभी तक नैक से मूल्यांकन नहीं करवाया है। नेशनल पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने नैक से ए ग्रेड पाने पर खुशी जताते हुए कहा कि राजधानी में सबसे ऊंचा ग्रेड पहली बार हमारे कॉलेज ने ही पाया है।
उन्होंने कहा कि आगे हमें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से न सिर्फ अधिक अनुदान मिलेगा बल्कि कॉलेज विद पोटेंशियल एक्सीलेंस (सीपीई) योजना के तहत एक करोड़ रुपए का अनुदान मिलेगा।
कॉलेज अपने यहां अब यूजीसी के फंड से कम्युनिटी कॉलेज खोलेगा और स्टूडेंट्स को वोकेशनल ट्रेनिंग देने के लिए शार्ट टर्म कोर्सेज शुरू करेगा।
डॉ. सिंह ने कहा कि इससे पहले राजधानी में आईटी व क्रिश्चियन पीजी कॉलेज ने नैक से मूल्यांकन करवाकर ए ग्रेड पाया था, तब नैक में ए प्लस, ए, बी, बी प्लस व सी ग्रेड होते थे।
यानि इन कॉलेजों को सेकंड कैटेगरी का ग्रेड मिला था। अब नैक ने बीते सालों में 1000 अंकों में ए, बी व सी ग्रेड में मूल्यांकन करना शुरू किया है। उसमें हमें सबसे ऊपर ए ग्रेड मिला है।
नैक मूल्यांकन में कुल 1000 अंकों का चार प्वॉइंट में तब्दील कर दिया जाता है और हमें 3.4 प्वॉइंट मिले हैं, जो हाल में नैक द्वारा 135 इंस्टीट्यूशंस के मूल्यांकन में बेहतर प्रदर्शन है।
उन्होंने बताया कि बीते 11, 12 व 13 नवंबर 2013 को उस्मानिया यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. टी तिरूपति राव की अध्यक्षता में नैक टीम ने कैंपस का दौरा किया था।
शनिवार सुबह ही कॉलेज के ए ग्रेड पाने की लिखित सूचना मिली। उन्होंने कहा कि इस काम में कॉलेज शिक्षकों, कर्मचारियों व स्टूडेंट्स ने भरपूर मदद की।
यूपी में सिर्फ तीन ही स्वायत्त कॉलेज हैं इसमें नेशनल पीजी कॉलेज, बनारस का उदय प्रताप कॉलेज (यूपी कॉलेज) और इलाहाबाद का इविंग क्रिश्चियन कॉलेज लेकिन इन दोनों ने अभी तक नैक से मूल्यांकन नहीं करवाया है।
स्नातक स्तर पर कम्युनिकेशन इंग्लिश, रीजनिंग, पर्सनॉलिटी डवलपमेंट और न्यूमेरिकल एबिलिटी पढ़ाई जाती है। हर क्लास में उपस्थिति के भी अंक होते हैं और क्लास प्रोजेक्ट भी तैयार करवाया जाता है।
यहां 100 प्रतिशत कॉपियों की स्क्रूटनी होती है और प्रश्नपत्र बनाने वाले टीचर को मॉडल आंसर भी लिखना होता है। स्टेप मार्किंग के साथ-साथ हम टॉपर्स की कापियां लाइब्रेरी में रखते हैं और बाकी सभी स्टूडेंट्स की कॉपियां उन्हें घर ले जाने को दे देते हैं।
रिसर्च की छूट न देने से हुआ नुकसान
प्रदेश में सिर्फ लखनऊ विश्वविद्यालय ही ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसने अभी तक कॉलेज शिक्षकों को पीएचडी करवाने की छूट नहीं दी है। डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि रिसर्च के अंक भी होते हैं।
लेकिन हमारे यहां कई अच्छे टीचर जो यूनिवर्सिटीज से तो पीएचडी करवाते हैं लेकिन अपने यहां के स्टूडेंट्स को पीएचडी नहीं करवा पा रहे हैं। एलयू की इस हठधर्मिता के चलते नैक मूल्यांकन में रिसर्च के नंबर नहीं मिले।
कॉलेज को बेहतर बनाने के लिए खाई गोली
राजधानी में नेशनल पीजी कॉलेज की स्थापना 1974 में हुई थी। सबसे पहले बीकॉम की पढ़ाई शुरू हुई इसके बाद वर्ष 1978 में बीए कोर्स शुरू हुआ। उस समय 200 स्टूडेंट व आठ टीचर्स थे।
वर्ष जनवरी 1991 में कॉलेज के प्राचार्य पद पर डॉ. एसपी सिंह ने पदभार संभाला और धीरे-धीरे बदलाव शुरू किया। वर्ष 2000 में उन्होंने रेग्युलर क्लास लेने पर टीचर पर सख्ती की तो एक टीचर ने उन पर दो गोलियां दाग दीं।
लेकिन इसके बाद भी उनका हौसला नहीं डिगा। डॉ. एसपी सिंह ने वर्ष 2008 में कॉलेज को राजधानी का पहला स्वायत्त कॉलेज बनाकर दिखा दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर कुछ भी किया जा सकता है। इस समय नेशनल पीजी कॉलेज में 4,600 स्टूडेंट हैं और कुल 110 टीचर पढ़ाते हैं।