अगर सब कुछ ठीक रहा तो उत्तराखंड के बच्चे रोजगार परक शिक्षा गुजरात के मोदी मॉडल से प्राप्त करेंगे।
रोजगार परक शिक्षा
दरअसल उच्च शिक्षा विभाग चाहता है कि कॉलेज की पढ़ाई के बाद दूसरी शिफ्ट में वहां पीपीपी मॉडल से रोजगार परक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। इस योजना में सरकार निजी संस्थाओं को ढांचागत व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।
पढ़ें, बेटे के लिए तांत्रिक के चंगुल में फंसी मां
जिसके बदले संबंधित कॉलेज के बच्चों को रोजगार परक पाठ्यक्रम में विशेष छूट मिलेगी। इससे प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर और ऊंचा हो सकेगा।
उच्च शिक्षा विभाग पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) की संभावनाएं तलाश रहा है। प्रदेश के सकल पंजीकरण अनुपात (ग्रास इनरोलमेंट रेश्यो) अन्य राज्यों से बेतहर कहीं बेहतर है।
पढ़ें, देहरादून में हाईटेक होगा नरेंद्र मोदी का शंखनाद
राष्ट्रीय औसत 19 प्रतिशत है जबकि उत्तराखंड का जीईआर 23 प्रतिशत है। जिसे देखते हुए विभाग उच्च शिक्षा केसाथ उसे रोजगार परक बनाने की दिशा में विचार कर रहा है। इसके लिए पीपीपी की आश्यकता और संभावना पर काम चल रहा है।
परियोजना का परीक्षण और अध्ययन
विभाग ने गुजरात के पीपीपी मॉडल के साथ अन्य राज्यों में उच्च शिक्षा के अन्तर्गत चल रही परियोजना का परीक्षण और अध्ययन करने को भी कहा है।
पढ़ें, यौन शोषण प्रकरणः अपर सचिव जोशी सस्पेंड
बताते हैं गुजरात में कॉलेज की पढ़ाई के बाद वहां निजी संस्थाएं रोजगार परक शिक्षा के पाठ्यक्रम आयोजित करती हैं। जिससे पढ़ाई के साथ बच्चे स्किल्ड और रोजगार से जुड़ रहे हैं।
उत्तराखंड में इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक-एक महाविद्यालय और देहरादून के तीन महाविद्यालयों समेत 15 महाविद्यालयों में रोजगार परक पाठ्यक्रम चयनित करने की बात कही गई है। इसके लिए अर्नेस्ट एवं यंग की जिलावार रिपोर्ट संज्ञान में लेने को कहा गया है।
प्रदेश में कौन से पाठ्यक्रम पढ़ाए जाएं और उनका फीस स्ट्रैक्चर क्या होगा यह भी सरकार तय करेगी। उपरैंखाल में पीपीपी मॉडल पर विद्यालय के संचालन के लिए एक ईओआई का प्रस्ताव निदेशालय एवं पीपीपी सेल की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा।