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दून में एमबीबीएस की पढ़ाई का सपना अधूरा

Mon, 31 Mar 2014 03:03 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के युवाओं का दून मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई करने का सपना इस साल भी पूरा नहीं होने वाला है।
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भवन की बुनियाद नहीं भरी जा सकी
दून मेडिकल कॉलेज में नवंबर-2014 से एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होनी थीं, लेकिन मार्च खत्म होने तक कॉलेज के लिए बनने वाले भवन की बुनियाद ही नहीं भरी जा सकी है।

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बाकी का इंफ्रास्ट्रक्चर तो दूर की कौड़ी है। खुद चिकित्सा शिक्षा विभाग भी निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। दून मेडिकल कॉलेज का निर्माण हरिद्वार रोड स्थित पुरानी जेल और महंत इंदिरेश अस्पताल के पीछे दो भागों में किया जा रहा है।
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निर्माण का जिम्मा यूपी निर्माण एजेंसी पर है। बजट आवंटन होने के बावजूद एक साल से यहां बुनियादी काम भी पूरा नहीं हो पाया है। एजेंसी से जुड़े लोगों का तर्क है कि लंबे समय से मजदूरों की कमी बनी हुई है।

उम्मीद थी कि जून 2014 तक निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) को मान्यता लेने के लिए प्रपोजल भेज दिया जाएगा। लेकिन निर्माण के काम की रफ्तार को देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि इस साल मेडिकल कालेज में पढ़ाई शुरू हो पाएगी।

साल दर साल बस इंतजार
नौ दिसंबर 2009 को राज्य सरकार के प्रपोजल पर दून पहुंची मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की टीम के सदस्य डॉ. रामप्रकाश, डॉ. शेरगिल और डॉ. विनीता जैन ने दून के सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करने के बाद मेडिकल कॉलेज को हरी झंडी दी थी।

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दो साल बाद मार्च 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया। तब कहा गया था कि मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी दो हास्पिटल पहले से तैयार हैं, इसलिए कुछ जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाकर जल्द ही कालेज शुरू कर दिया जाएगा।

सरकार बदली तो मेडिकल कॉलेज का सपना फिर उठान पर आया। तय किया गया कि वर्ष 2014 तक जरूरी बिल्डिंग बनाकर एमसीआई को इंस्पेक्शन का न्योता भेज दिया जाएगा। लेकिन अभी तक तो मेडिकल कॉलेज का भवन हीं नहीं बन पाया है।

ऐसे मिलेगी मान्यता
एमसीआई के नियमानुसार पहले पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के बाद राज्य सरकार की ओर से एक प्रपोजल मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया को भेजा जाएगा।

एमसीआई की टीम अपने पैमानों पर जांच करेगी। इसके बाद मान्यता मिल पाएगी। यह लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कई माह का वक्त लग जाता है।

यह होगा फायदा
प्रदेश में सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कॉलेज श्रीनगर पहले से संचालित हो रहे हैं।

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इन कॉलेजों में राज्य के छात्रों के लिए कुल 160 एमबीबीएस की सीटें हैं। दून मेडिकल कॉलेज बनने से प्रदेश में सरकारी एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़कर 240 हो जाएगी।
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इससे प्रदेश के युवा प्रदेश में ही सेवा देंगे। इससे डॉक्टरों की कमी दूर होगी और महंगी चिकित्सा शिक्षा से मुक्ति मिलेगी।

निर्माण एजेंसी का कार्य बेहद धीमा है। हमने इस बार एमसीआई को प्रपोजल भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन जिस रफ्तार से कार्य हो रहा है, उससे फिलहाल उम्मीद नजर नहीं आ रही। जल्द ही मेडिकल कॉलेज निर्माण की समीक्षा कर कोई नतीजा निकालेंगे।
- डॉ. आरपी भट्ट, महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा
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