उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यहां सिर्फ सरकारें बनती हैं फिल्में नहीं। फिल्म निर्देशक और अभिनेता तिग्मांशु धूलिया का यह तंज उत्तराखंड के राजनीतिक व प्रशासनिक सिस्टम पर है।
लोकेशन की रेकी करने आए उत्तराखंड
जो अपार संभावनाओं के बावजूद प्रदेश की तस्वीर दुनिया के सामने नहीं लाना चाहता है। तिग्मांशु इन दिनों अपनी नई फिल्म के लिए बेहतर लोकेशन की रेकी करने उत्तराखंड आए हैं।
तिग्मांशु का कहना है कि उन्हें अपने प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर से प्यार है। उनकी कोशिश है कि यहां के खूबसूरत नजारे कैद कर फिल्मों के माध्यम से दुनिया के सामने लाए और ताकि पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से आकर देंखे।
उनका कहना है कि अर्से से फिल्म निर्माताओं के लिए उत्तराखंड आकर्षण का केंद्र रहा है। सालों पहले राजकपूर ने अपनी फिल्मों में यहां की अद्भुत छटा दिखाई है। ऐसे में अब अगर निर्माता यहां नहीं आना चाहते हैं तो लॉजिस्टिक की वजह से।
संसाधन की कमी की वजह से लौट जाते हैं लोग
उत्तराखंड में विदेशों और हिमाचल, कश्मीर से अधिक खूबसूरत लोकेशन हैं लेकिन यहां संसाधन की कमी की वजह से लोग लौट जाते हैं।
फिल्म पान सिंह तोमर के पुरस्कृत होने के बाद उत्तराखंड सरकार (विजय बहुगुणा) ने तिग्मांशु को अपना ब्रांड एम्बेस्डर घोषित किया था। नि:शुल्क सेवाएं देने को तैयार तिग्मांशु का इस्तेमाल अभी तक उस तरह नहीं हुआ है।
उत्तराखंड कई सरकारें आई और गई लेकिन अभी तक कोई फिल्म पॉलिसी नहीं बन सकी है। लॉजिस्टिक और संसाधन न होने की वजह से पिछले दिनों कई प्रोडक्शन हाउस मनाली और हिमाचल की अन्य जगहों पर चले गए।a