एलयू में अब दलित छात्रा को मेडल देने की बजाए दंड की तैयारी की जा रही है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि छात्रा को पहले हमसे शिकायत करनी चाहिए थी लेकिन वह पहले मीडिया में पहुंच गई।
इस प्रकरण पर यूनिवर्सिटी प्रशासन को काफी जिल्लत झेलनी पड़ रही है। ऐसे में अब उस पर नियमानुसार कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल, राजभवन की ओर से इस पूरे मामले पर जो रिपोर्ट मांगी गई थी।
सोमवार को उसका जवाब बनाकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भेज दिया। उधर, छात्रा सीमा चंद्रा का कहना है कि एलयू का यह दोहरा चरित्र सबके सामने आ गया।
उसे खुद अपने मेधावियों के बारे में जानकारी नहीं रहती है, अगर कोई बाहर हो तो उसे यूनिवर्सिटी अपनी ओर से कोई जानकारी देने की जहमत नहीं उठाती।
छात्रा ने कहा कि चांसलर मेडल के लिए विभागाध्यक्ष से ही नॉमिनेशन मांगा गया था। फिलहाल, अब वह कोर्ट जाने की तैयारी में है।
एलयू के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने कहा कि कुलाधिपति की ओर से इस पूरे मामले पर मांगी गई रिपोर्ट का बिंदुवार जवाब दे दिया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई गलती नहीं की गई है।
छात्रा यूनिवर्सिटी की छवि धूमिल करने का काम कर रही है। ऐसे में अब हम इसे मेडल की बजाए दंड देने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर सीमा चंद्रा का कहना है कि चक्रवर्ती गोल्ड मेडल के लिए आवेदन किया था।
तो आखिर चांसलर मेडल के लिए क्यों न करते, जबकि यूनिवर्सिटी का यह सबसे प्रतिष्ठित पदक है। खुद 29 अक्तूबर को विवि के परीक्षा नियंत्रक की ओर से जो पत्र जारी किया गया है, उसमें सभी डीन और विभागों से मेधावियों के नाम मांगे गए हैं।
26 नवंबर तक सभी से नॉमिनेशन मांगा गया लेकिन इस बीच एक बार भी विभाग की ओर से जानकारी नहीं दी गई, जबकि हर संस्थान में मेधावियों को पूरी जानकारी देने की व्यवस्था है।
सीमा चंद्रा कहती हैं कि उन्होंने टॉप किया तभी दो गोल्ड मेडल मिले हैं और यह मेहनत का नतीजा है। इधर, लूटा महामंत्री डॉ. नीरज जैन कहते हैं कि इस मामले को यूनिवर्सिटी प्रशासन और छात्रा को आमने-सामने बैठकर हल करना चाहिए। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कर्तव्य है कि वह अपने स्टूडेंट को पूरी जानकारी समय पर दे।