एलयू में सोमवार का नजारा और दिनों की तुलना में कुछ अलग दिखाई पड़ा। सभी विभागों में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद थीं। दरअसल, नैक मूल्यांकन की विशेषज्ञ टीम मॉकड्रिल के तहत विभागों की तैयारियां परखने जा रही थी।
रिसर्च स्टूडेंट के कक्ष, पेयजल व्यवस्थाएं, टॉयलेट आदि सभी कुछ दुरुस्त मिले। यहां तक कि विभाग में कहां क्या-क्या है, सभी को लिखकर जगह-जगह प्रदर्शित किया गया था।
गुरुजी भी एकदम अलर्ट थे। कुछ विभागों की तैयारियां सही थीं तो कुछ ने निराश किया। कई विभागों में गुरुजी सही जानकारी नहीं दे पा रहे थे, उल्टे विभाग की महिमा का बखान करने लगे तो कुछ ने पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन तैयार नहीं किया था।
फिलहाल, टीम ने सभी विभागों को सुझाव देते हुए कहा कि अपनी अच्छाइयों को बेहतर ढंग से उजागर करें और जो भी कमियां हैं, उन्हें गिनाने की कोशिश मत करें। पहले दिन टीम ने करीब 28 विभागों का दौरा किया।
मंगलवार को टीम शेष 26 विभागों का दौरा करेगी। वर्ष 2002 के बाद से अब फरवरी, 2014 में लविवि में यूजीसी की ओर से नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) मूल्यांकन होना है।
तैयारियों की समीक्षा और सुधार के लिए विवि ने विशेषज्ञों की टीम को आमंत्रित किया। टीम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति फुरकान कमर, आगरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. भूमित्रदेव, औरंगाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार धारोड़कर व डॉ. जांगीरदार शामिल हैं।
विशेषज्ञों की टीम ने सोमवार को विवि के विभिन्न विभागों की जांच की। सबसे पहले टीम अर्थशास्त्र विभाग पहुंची। यहां विभागाध्यक्ष प्रो. हर्ष मोहन से विभाग की पूरी रिपोर्ट ली गई।
यहां की प्रेजेंटेशन से टीम संतुष्ट नहीं दिखी, विशेषज्ञों ने कहा कि जितना काम किया, वह अच्छा है लेकिन इसे बेहतर ढंग से पेश करें। कहा कि अगर आपके यहां बीए व एमए इकोनॉमिक्स में पर्यावरण अर्थशास्त्र पढ़ाया जाता है तो उसे ढंग से प्रचारित करें।
कैपेसिटी बिल्डिंग की वर्कशॉप कराई तो जरूर बताएं, नेट पास अभ्यर्थियों का हर साल ब्योरा दें। एल्युमनाई की जानकारी भी नैक को दें। अच्छे काम बताएं, कमियों को खुद मत गिनाएं। इसके बाद टीम अंग्रेजी विभाग पहुंची।
यहां पर विभागाध्यक्ष प्रो. निशि पांडेय के पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन से टीम संतुष्ट दिखी। अमेरिकी दूतावास के सहयोग से बनाए जाने वाले वेबपोर्टल को नैक मूल्यांकन के पहले तैयार करने, लैंग्वेज लैब व टेक्स्ट ट्रांसलेशन का काम भी पूरा करने की सलाह दी, ताकि नैक मूल्यांकन के लिए जो टीम आए उसे यहां यह चीजें भी दिखें।
इसके बाद टीम फिजिक्स विभाग पहुंची, यहां पर पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन पेश करने के लिए सीनियर प्रोफेसर यूडी मिश्रा तैयार थे लेकिन प्रेजेंटेशन की शुरुआत में ही अपने काम को बढ़ा-चढ़ा कर बताने लगे।
इस पर विशेषज्ञों ने कहा कि जो कुछ विभाग में हुआ है, उसे कम शब्दों और सटीकता से पेश करें। दूसरी फैकल्टी ने जो अच्छी फैलोशिप हासिल की है और जर्नल में लिखा है, उसके बारे में बताइए।
फोटोग्राफ भी पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन में दिखाइए। इसके बाद टीम ने केमेस्ट्री विभाग का दौरा किया यहां पर भी उसने सुधार के कई सुझाव दिए। टीम यहां की तैयारियों से कुछ खास संतुष्ट नहीं थी।
भूगर्भ विज्ञान विभाग में टीम तैयारियों से संतुष्ट नजर आई। वहीं, अरेबिक, उर्दू, शारीरिक शिक्षा और ओरिएंटल संस्कृत विभाग में पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन ही तैयार नहीं किया गया था।
इन विभागों के अध्यक्षों ने बताया कि उनका विभाग छोटा है, उनसे कहा गया कि आप अपनी ओर से पूरी तरह तैयार रहें। जो भी कुछ किया है उसे ढंग से बताएं।
शाम को टीम पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग पहुंची यहां पर विभाग में स्टूडेंट्स की ओर से बनाई गई फिल्में देखीं और कहा कि जो कुछ काम सबसे अच्छे हैं उन्हें प्वाइंटर के साथ प्रदर्शित कीजिए।