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लखनऊ विवि को ढूंढे नहीं मिल रहे अपने ही टॉपर्स

Thu, 06 Feb 2014 08:23 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
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एलयू में टॉपर्स ढूंढना कितना मुश्किल काम है, यह टॉपर्स अकेडमी बनाने के दौरान पता चल गया। नंबर सहित स्टूडेंट्स की पूरी लिस्ट जिस परीक्षा विभाग के पास होती है।
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उसी ने पहली बार में 172 स्टूडेंट्स की गलत लिस्ट बना दी। इनमें से अधिकांश तो अब यूनिवर्सिटी में पढ़ ही नहीं रहे हैं। फिर दो बार और विभागों में घूमकर फॉर्म भरवाने की मशक्कत के बाद 55 मेधावियों की सूची मिल पाई।

आठ फरवरी से टॉपर्स अकेडमी काम करना शुरू कर देगी। अब तक सभी टॉपर्स की सूची नहीं मिल पाई है। ऐसे में लिस्ट में अभी और कितने स्टूडेंट्स जुड़ेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता।
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मालूम हो कि एलयू नैक मूल्यांकन के मद्देनजर विवि में टॉपर्स अकेडमी का गठन कर रहा है, जो स्टूडेंट्स और लविवि के बीच एक पुल का काम करेगी।

टॉपर्स अकेडमी का मुख्य मकसद स्टूडेंट्स के लिए क्या बेहतर काम किए जाएं, जिससे यूनिवर्सिटी का माहौल अच्छा बने और यहां के छात्र देश-दुनिया में नाम रोशन करे, इसके मार्ग तलाशना है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन व विभागों के बीच टॉपर्स एक पुल की तरह काम करेंगे। टॉपर्स के आइडिया को एलयू मूर्तरूप देकर स्टूडेंट्स को बेहतर सुविधाएं देगा।

इसमें यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के कोर्स, प्लेसमेंट व मूलभूत सुविधाओं आदि दिलाने पर अपनी राय देंगे लेकिन अपने ही मेधावियों की खोज में एलयू के पसीने छूट गए।

टॉपर्स अकेडमी गठित करने के लिए मांगी गई सूची में परीक्षा विभाग ने 172 स्टूडेंट्स की गलत सूची थमा दी। जब बैठक बुलाई गई तो उनमें बहुत कम ही स्टूडेंट्स पहुंचे।

पता चला कि परीक्षा विभाग की ओर से दी गई सूची में अधिकांश स्टूडेंट्स के मोबाइल नंबर गलत हैं और उनमें से कई पासआउट स्टूडेंट्स निकले। फिर एलयू प्रशासन ने टॉपस ढूंढने के लिए विभागवार फॉर्म पहुंचाए।

लेकिन विभागों ने भी जो जानकारी दी, उनमें तमाम स्टूडेंट्स एलयू से पासआउट निकले। इतनी मेहनत के बाद भी जब सही सूचना नहीं मिली तो टॉपर्स अकेडमी का काम देख रहे गुरुजी ने विभागों के हाथ जोड़ लिए।

अब टॉपर्स जुटाने के लिए खुद विभागों में फिर फॉर्म भरवाए तो नतीजा निकलकर आया कि 55 मेधावी इस समय एलयू में पढ़ रहे हैं। बाकी बचे कोर्सेज के टॉपर्स के नाम इसमें जोड़े जाएंगे और संख्या बढ़ेगी।

फिलहाल, आठ फरवरी को टॉपर्स अकेडमी की बैठक बुलाई गई है। मालूम हो कि एलयू प्रशासन ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की ओर से मूल्यांकन करवाए जाने के मद्देनजर यह टॉपर्स अकेडमी बनाई है।

परीक्षा विभाग के खराब सामंजस्य ने बिगाड़ा खेल
एलयू में परीक्षा विभाग के पास अगर हर क्लास के टॉपर्स का नाम व मोबाइल नंबर नहीं है तो यह बड़ा सवाल है, जबकि स्टूडेंट्स के बारे में सारी जानकारी परीक्षा विभाग में ही होती है।

लेकिन ऐसा परीक्षा विभाग जो स्टूडेंट्स के एनरोलमेंट नंबर तक मिस कर देता है, उसके पास टॉपर्स तक का ठीक से रिकॉर्ड न होना कोई ज्यादा आश्चर्यजनक बात नहीं।

फिलहाल, एलयू में किसी तरह टॉपर्स अकेडमी तो बन गई लेकिन आगे इसमें कितने नाम और जुड़ पाएंगे यह कह पाना मुश्किल है। क्योंकि विभागों के पास भी सही-सही जानकारियां नहीं हैं।
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