लखनऊ विश्वविद्यालय में स्नातक के बाद अब पीजी की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ऑर्डिनेन्स के नियमों को दरकिनार करते हुए प्रवेश किए जा रहे हैं। इससे लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का हक मारा जा रहा है।
नियम के अनुसार पीजी कक्षाओं में अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों को 20 फीसदी सीटों पर ही सशर्त दाखिला मिला है। शर्त यह होती है कि रिजर्व सीटों पर भी लविवि अभ्यर्थियों की कटऑफ मेरिट से नीचे मेरिट जाने पर बाहरी विश्वविद्यालय के छात्रों को दाखिला नहीं मिलेगा।
ऐसी स्थिति में अन्य विश्वविद्यालय के अभ्यर्थियों की बची सीटों पर लविवि अभ्यर्थियों को दाखिला दे दिया जाएगा। लेकिन एमए हिंदी और एमए उर्दू में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें इस नियम का पालन नहीं किया गया।
इसकी वजह से इन दोनों ही विषयों के लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण बहुत से अभ्यर्थियों का नाम सेलेक्टड की जगह वेटिंग लिस्ट में चला गया। इतना ही नहीं दोनों ही विषयों के लिए विश्वविद्यालय ने प्रवेश भी कर लिए हैं। इन दोनों विषयों में मेरिट की गड़बड़ी से बाकी विषयों की मेरिट पर भी सवाल उठने लगे हैं।
गलत मेरिट तैयार कर लिए प्रवेश
ऑर्डिनेन्स पूरी तरह से एलयू के स्नातकों को प्रवेश देने के लिए प्राथमिकता देता है। लेकिन यहां प्रवेश का कार्य कर रहे शिक्षकों ने नियमों की अनदेखी करके मेरिट सूची तैयार की है।
एमए उर्दू में ओपन कैटेगरी के सेलेक्टेड अभ्यर्थियों की सूची में अंतिम अभ्यर्थी की कटऑफ 59.444 है। इसी कोर्स की अन्य विश्वविद्यालय वाली सेलेक्टेड अभ्यर्थियों की सूची में अंतिम अभ्यर्थी की कटऑफ 47.444 है जो कि एलयू से काफी नीचे है।
एमए उर्दू के प्रवेश 28 अगस्त को किए गए हैं। एमए हिंदी की कटऑफ सूची में भी गड़बड़ी है। ओपन कैटेगरी की सेलेक्टेड लिस्ट में अंतिम अभ्यर्थी के स्नातक में 61.444 फीसदी अंक हैं।
जबकि अन्य विश्वविद्यालय की ओपन सेलेक्टेड लिस्ट के अंतिम अभ्यर्थी के 59.050 फीसदी। इसमें ध्यान देने वाली बात ये भी है कि अन्य विश्वविद्यालयों की कटऑफ से अधिक अंक पाने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के स्नातक अभ्यर्थियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया है। एमए हिंदी के प्रवेश 26 अगस्त को किए गए हैं।
ये है नियम
ऑर्डिनेन्स के अनुसार पीजी स्तर पर किसी भी कोर्स की कुल सीटों में से 80 फीसदी पर एलयू के स्नातकों का प्रवेश लिया जाता है। शेष 20 फीसदी सीटें अन्य विश्वविद्यालयों के स्नातकों के लिए हैं।
एक शर्त भी है कि अन्य विश्वविद्यालय के अभ्यर्थियों की मेरिट लविवि अभ्यर्थियों के कटऑफ से कम न हो। यदि ऐसा होता है तो अन्य विश्वविद्यालय के अभ्यर्थियों की आरक्षित सीटें लविवि कोटे में चली जाती हैं।
बाद में बदल दी मेरिट लिस्ट
एलयू में शुक्रवार को एमकॉम प्योर की काउंसलिंग के दौरान बड़ी गड़बड़ी सामने आई। प्रवेश समन्वयक कार्यालय की ओर से विभाग को भेजी गई लिस्ट में एक ऐसी कैंडीडेट का नाम शामिल था जो कि वेबसाइट पर उपलब्ध लिस्ट में नहीं था।
इस कैंडिडेट का नाम कोर्स की वेटिंग लिस्ट में डिफेंस पर्सनल की श्रेणी में था। असल में विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जो लिस्ट उपलब्ध थी उसमें डीपी की वेटिंग लिस्ट में पहला नाम सौरभ मिश्रा का था।
लेकिन शुक्रवार को जब सौरभ अपनी काउंसलिंग के लिए कॉमर्स विभाग पहुंचा तो उससे पहले एक लड़की का नाम लिस्ट में था। बताया जा रहा है कि वेटिंग लिस्ट आने पर डीपी की एक ही सीट बची थी जिसके लिए वह लड़की एलिजबल हो रही थी।
इस पर विभागाध्यक्ष ने सौरभ से कहा कि उसका प्रवेश नहीं हो सकता। हालांकि बाद में एक सीट बचने पर सौरभ को प्रवेश मिल पाया। इस प्रकरण से ये सवाल उठ रहे हैं कि विश्वविद्यालय की सूची में जो नाम नहीं थे वे अचानक लिस्ट में कहां से आ गए।
सभी विभागाध्यक्षों को कहा गया है कि वे अपने यहां आने वाली मेरिट लिस्ट में आवश्यकतानुसार संशोधन करते हुए प्रवेश दें। यदि मेरिट में गड़बड़ी है तो उसे सही किया जाए। जहां तक सौरभ मिश्रा वाले प्रकरण की बात है तो मेरिट सूची में संशोधन की वजह से लड़की का नाम पहले आ गया। उसे वेबसाइट पर सही नहीं किया जा सका लेकिन विभाग को सही सूची भेजी गई। (प्रो. एनके पांडेय, प्रवक्ता, लखनऊ विश्वविद्यालय)