दिल्ली यूनिवर्सिटी में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की उम्मीदों को आप की यूथ विंग छात्र युवा संघर्ष समिति की करारी हार से बड़ा झटका लगा है।
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डूसू चुनाव में सीवाईएसएस का बुरी तरह से सूफडा साफ हुआ और आम आदमी पार्टी की यूथ विंग खाता भी नहीं खोल सकी। वहीं एबीवीपी ने ना केवल जीत दर्ज की बल्कि अध्यक्ष पद के साथ चारों सीटों पर क्लीन स्वीप किया।
जबकि कांग्रेस का युवा संगठन एनएसयूआई एक बार फिर वापसी करने में नाकाम रहा। हालांकि इन चुनावों नतीजों के बाद बहस का मुद्दा कांग्रेस की हार नहीं बल्कि केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के संगठन की करारी शिकस्त है।
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प्रत्याशियों से ज्यादा केजरीवाल का प्रचार
इसकी वजह दिल्ली सरकार का डूसू चुनाव में जोरदार प्रचार-प्रसार और सीएम का यूनिवर्सिटी चुनाव में पूरा दमखम झोंक देना माना जा रहा है।
दरअसल आम आदमी पार्टी ने इन चुनावों में अपने प्रत्याशियों से ज्यादा प्रचार केजरीवाल के चेहरे और ईमानदार राजनीति का किया। चुनाव प्रचार को देखकर ऐसा लग रहा था कि आम आदमी पार्टी इस चुनाव को प्रतिष्ठा प्रश्न बना चुकी थी। साइन बोर्ड और होर्डिंग्स से लेकर प्रत्येक प्रचार सामग्री पर केजरीवाल की तस्वीर नजर आ रही थी।
सितारों की मौजूदगी में छात्रों को लुभाने के लिए रॉक शो भी किया गया, जिसमें खुद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल मौजूद रहे। इतना ही नहीं विधायकों और सांसदो की ड्यूटी तक छात्र संघ में लगाई गई।
आप ने क्यों बनाया प्रतिष्ठा प्रश्न?
ऐसे में विपक्षी पार्टियों को एक बार फिर केजरीवाल पर हमला बोलने और चुटकी लेना का मौका मिल गया है। विरोधियों के मुताबिक डूसू चुनाव में केजरीवाल ने धनबल का खूब इस्तेमाल किया और जनता के पैसे को बर्बाद किया।
लेकिन छात्र संघ चुनाव में उन्हें पूरी तरह नकार दिया गया। भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी ने अपनी जीत को केजरीवाल और उनकी सरकार की हार करार दिया है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ट्वीट करते हुए एबीवीपी को बधाई दी। अमित शाह ने लिखा कि परिषद के सभी कार्यकर्ताओं को डूसू चुनाव में सभी सीटें जीतने के लिए दिल से बधाई।विचारधारा की जीत। Heartiest Congratulations to all Parishad karyakartas on clean sweep in DUSU Polls.
A victory of ideology #ABVPRocks pic.twitter.com/YEqofLHONN— Amit Shah (@AmitShahOffice) September 12, 2015
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने भी एबीवीपी को बधाई दी है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत भी छात्र राजनीति से ही की थी।