जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने अपने छात्रों और शिक्षकों को यौन उत्पीड़न के मामलों को प्रचारित न करने और इनमें सख्ती से गोपनीयता बनाए रखने का निर्देश जारी किया है। प्रशासन का यह निर्देश उस समय आया है जबकि जेएनयू में सबसे ज्यादा यौन उत्पीड़न के मामले सामने आ चुके है।
जेएनयू प्रशासन के इस निर्देश के आने से पहले शिक्षकों के एक समूह ने भी इस तरह की खबरों को प्रचारित करने और जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हरसमेंट (जीएसकैश) के एक्शन को लेकर आलोचना की थी।
जीएसकैश जेएनयू में यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच करता है। शिक्षकों का कहना है कि यह कमेटी ठीक से जांच नहीं करती। इसमें आने वाली शिकायतें गलत होने के साथ यह सिर्फ शिक्षकों के सम्मान को ठेस पहुंचाने, उन्हें बदनाम करने और पब्लिक ट्रायल करने के लिए किया जाता है।
जेएनयू प्रशासन के एक अधिकारी की मानें तो इस तरह के पूरे मामलों की पूरी गोपनीयता के साथ जांच करनी चाहिए। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता है। कमेटी एक डरावना वातावरण बना देती है। यौन उत्पीड़न के मामलों को इतना प्रचारित कर दिया जाता है कि चारों तरफ डर और शांति फैल जाती है।
जबकि ऐसे मामलों में शांति बनाए रखना चाहिए। ऐसे में मामलों के किसी भी व्यक्ति के निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। ऐसे में जीएस कैश को शिकायतों पर कार्यवाही के दौरान तक मामले को पूरी तरह से गोपनीय रखना चाहिए। उसे राजनीतिक लाभ उठाने के लिए प्रचारित नहीं किया जाना चाहिए।