उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा एवं परीक्षा परिषद दसवीं और 12वीं के हजारों बोर्ड परीक्षार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है।
बोर्ड कापियों के मूल्यांकन का दौर अंतिम चरण में है, लेकिन विषय विशेषज्ञ नहीं बल्कि व्यायाम शिक्षकों से ये कापियां जंचवाई जा रही हैं।
बिना विषय ज्ञान के कर रहे मूल्यांकन
स्थिति यह है कि राजधानी के ही दो मूल्यांकन केंद्रों जीआईसी पटेलनगर और एसजीआरआर नेहरूग्राम में अन्य शिक्षकों के साथ 50 से अधिक व्यायाम शिक्षक तैनात किए गए हैं।
यही नहीं, नियमानुसार मूल्यांकन ड्यूटी के लिए शिक्षक का सेवाकाल कम से कम पांच साल होना चाहिए, लेकिन ड्यूटी पर उन शिक्षकों को लगाया गया है जिनका कार्यकाल सिर्फ दो-तीन साल है।
अब ये शिक्षक बिना विषय की जानकारी और अनुभव के किस तरह कापियों पर नंबर दे रहे हैं, यह जल्द जारी होने वाले रिजल्ट से साफ हो जाएगा।
ड्यूटी पर हैं, नहीं जांची एक भी कापी
मूल्यांकन में लगे कई शिक्षक ऐसे भी हैं, जिन्होंने दस दिन में एक भी कापी नहीं जांची है। सूत्र बताते हैं कि दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में तैनात इन शिक्षकों ने स्कूल जाने से बचने के लिए अपनी ड्यूटी मूल्यांकन में लगवाई थी। हैरत की बात यह है कि विभाग की ओर से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अवधि पूरी, काम अधूरा
कापियां जांचने के लिए 22 अप्रैल से एक मई तक की अवधि निर्धारित की गई थी। लेकिन दून में अब तक काम पूरा नहीं हो सका है। यहां हिंदी, संस्कृत की दो हजार से अधिक कापियों का मूल्यांकन अभी बाकी है।
उधर, शिक्षकों को चार मई को चुनाव ड्यूटी के लिए चकराता और कालसी सहित विभिन्न मतदेय केंद्रों के लिए निकलना है। ऐसे में मूल्यांकन का काम इस तारीख से पहले हर हाल में पूरा करना होगा।