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पहली बार दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में भारत के दो विवि

Fri, 18 Sep 2015 01:00 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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पहली बाद देश के दो विश्वविद्यालयों को दुनिया के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में जगह मिली है। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2015 की रिपोर्ट में यह बात उजागर हुई। इसमें अब तक भारत का कोई विश्वविद्यालय शीर्ष 100 तो छोड़िये, शीर्ष 200 में भी जगह नहीं बना पा रहा था।
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पहली बार क्यूएस की रैंकिंग में देश के दो विश्वविद्यालय शामिल हुए हैं। इनमें आईआईएससी बैंगलोर को दुनिया में 147वीं तो आईआईटी दिल्ली को 179वीं रैंक दी गई है।

रैंकिंग में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी), यूएसए को दुनिया में पहली रैंक मिली है। जबकि दूसरे स्थान पर यूएसए का हार्वर्ड विश्वविद्यालय रहा है। क्यूएस रैंकिंग में तीसरे स्थान पर संयुक्त रूप से यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज और यूएसए की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने कब्जा जमाया है।
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734 विवि में से केवल 14 शीर्ष 400 में
देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर हमेशा चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन हकीकत यह है कि देश में मौजूद 734 विश्वविद्यालयों में से केवल 14 विश्वविद्यालयों को ही क्यूएस रैंकिंग में शीर्ष 400 में जगह मिली पाई है।

जिन विश्वविद्यालयों ने इसमें देश का नाम ऊंचा किया है, उनमें भी ज्यादातर आईआईटी हैं। इससे जाहिर होता है कि देश में आज भी शिक्षा की गुणवत्ता के पैमाने सिर्फ आईआईटी में ही पूरे किए जाते हैं।
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किस विवि को मिली कौन सी रैंक

रैंक - विश्वविद्यालय
147 - आईआईएससी बैंगलोर
179 - आईआईटी दिल्ली
202 - आईआईटी बांबे
254 - आईआईटी मद्रास
271 - आईआईटी कानपुर
286 - आईआईटी खड़गपुर
391 - आईआईटी रुड़की
451-460 - आईआईटी गुवाहाटी
481-490 - दिल्ली यूनिवर्सिटी(डीयू)
600-650 - यूनिवर्सिटी ऑफ कलकत्ता
700 से ऊपर - बीएचयू, पंजाब यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई, यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे

क्या है क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग
क्वाक्वारेली सिमंड्स (क्यूएस) कंपनी की ओर से हर साल विभिन्न पैमानों पर दुनिया भर के विश्वविद्यालयों की रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। इसमें न केवल दुनिया के सभी संस्थानों की एक साथ रैंकिंग जारी की जाती है, बल्कि एशिया, लैटिन अमेरिका और ब्रिक्स की रीजनल रैंकिंग रिपोर्ट भी प्रकाशित की जाती है।

रैंक तैयार करने के लिए विश्वविद्यालयों में एकेडमिक रिव्यू, शिक्षक-छात्र अनुपात, रिसर्च, इंप्लायर की रेपुटेशन, अंतरराष्ट्रीय छात्रों का अनुपात, अंतरराष्ट्रीय शिक्षकों का अनुपात को आधार बनाया जाता है।

विदेशों में किसी भी विश्वविद्यालय के पास कॉलेजों की संबद्धता का भार नहीं होता है। हमारे यहां विश्वविद्यालयों से सैंकड़ों कॉलेजों को संबद्ध कर दिया जाता है। आईआईटी दिल्ली का 300 करोड़ का बजट है, जो कि पांच करोड़ डॉलर बनता है। अमेरिका में एक विश्वविद्यालय को सालाना कम से कम 500 करोड़ डॉलर का बजट मिलता है। विदेशों में शिक्षकों का फोकस शोध पर होता है। यहां शिक्षकों को शोध और शिक्षण दोनों कार्य करने होते हैं। इसलिए हमारे देश के विश्वविद्यालय रैंकिंग में पिछड़ जाते हैं।
- प्रो. डीएस चौहान, सचिव, आल इंडिया यूनिवर्सिटी एसोसिएशन
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