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उत्तराखंड के इंजीनियरिंग कॉलेजों में गैरकानूनी दाखिले

Wed, 29 Jul 2015 12:54 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में इंजीनियरिंग का सूनापन देख अब कॉलेज नए-नए हथकंडे आजमाने लगे हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों ने सरकारी काउंसिलिंग के बीच ही सरकारी कोटे की सीटों पर सीधे एडमिशन शुरू कर दिए हैं।
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जबकि इसके लिए विवि की ओर से अभी कोई परमीशन नहीं दी गई है। ऐसे में फिलहाल यह एडमिशन गैर कानूनी तौर पर हो रहे हैं। यूटीयू के संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में इन दिनों जेईई मेंस की काउंसिलिंग के आधार पर एडमिशन चल रहे हैं।

इन कॉलेजों में बेहद कम भीड़ के चलते भारी सूनापन है। कई कॉलेज तो बंदी के कगार पर पहुंच चुके हैं। छह इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे हैं, जिनमें सिर्फ दस या इससे कम सीटें पहले चरण में अलॉट हुई हैं और कोई एडमिशन लेने को नहीं आ रहा है।
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ऐसे हालात में अब कॉलेजों ने खुद ही रास्ता बना लिया है। तमाम इंजीनियरिंग कॉलेजों में सरकारी कोटे की सीटों पर डायरेक्ट एडमिशन दिया जा रहा है। हर साल तीन चरण की काउंसिलिंग होने के बाद शासन से अनुमति मिलने के बाद इन कॉलेजों में 12वीं में 45 प्रतिशत तक के छात्रों को सीधे एडमिशन की अनुमति दी जाती है।

इस साल अनुमति मिलने से पहले ही कॉलेजों ने गैरकानूनी एडमिशन शुरू कर दिए हैं। कॉलेजों का तर्क है कि शासन से अनुमति मिल ही जाएगी। लेकिन यह जरूरी नहीं है कि शासन अनुमति दे ही दे। ऐसे में जिन छात्रों को इन सीटों पर दाखिला दिया जा रहा है, उनका भविष्य भी दांव पर लग सकता है।

गौरतलब है कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों की 11800 सीटों पर दाखिले के लिए अब तक केवल तीन हजार सीटें अलॉट हुई हैं। इनमें से भी करीब आधी सीटों पर ही दाखिला हो पाया है।

शासन से अनुमति के बाद ही बीटेक के सीधे दाखिले होते हैं। अभी तक शासन ने कोई अनुमति नहीं दी। विवि ने भी कोई परमीशन नहीं दी है। अगर ऐसे एडमिशन हो रहे हैं तो यह गैरकानूनी हैं। हम इसकी जांच कराएंगे और संबंधित कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. आशीष उनियाल, उपकुलसचिव, यूटीयू
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