अगर आप आरक्षित वर्ग (एससी/ एसटी/ सामान्य विकलांग/ ओबीसी श्रेणी) के अभ्यर्थी हैं और आईआईटी में दाखिले का सपना रखते हैं, लेकिन जेईई एडवांस में उम्मीदों के मुताबिक अंक हासिल नहीं कर सके तो निराश न हों।
एक वर्षीय प्रीपेरेटरी कोर्स में प्रवेश
आईआईटी इस वर्ग में उन छात्रों को भी दाखिला देते हैं, जिन्होंने एडवांस परीक्षा में कुल चार सौ अंकों में से महज 8.75 प्रतिशत अंक (विषयवार सौ अंकों का करीब 2.5 प्रतिशत) भी प्राप्त किए हों।
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हालांकि, ऐसे छात्रों को आईआईटी में एक वर्षीय प्रीपेरेटरी कोर्स में प्रवेश दिया जाता है। इस कोर्स में इंजीनियरिंग का बेसिक कोर्स सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद उन्हें चार वर्षीय बीटेक कोर्स में दाखिला मिलता है।
इसलिए दिया जाता है मौका
जेईई मेन्स के बाद जेईई एडवांस का सफर पार करना आसान नहीं होता। देशभर के शीर्ष 1.5 लाख छात्र एडवांस के लिए चुने जाते हैं। इसके बावजूद अंक कम होने से आरक्षित वर्ग की कई सीटें खाली रह जाती हैं।
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इन सीटों को भरने के लिए ही प्रीपेरेटरी कोर्स चलाया जाता है। इसके लिए अलग से मेरिट जारी की जाती है। इस वर्ष यह कोर्स पूरा करने के बाद 146 छात्र आईआईटी के बीटेक में प्रवेश लेने वाले हैं। हालांकि, इनके लिए इंजीनियरिंग ब्रांच का निर्धारण आईआईटी ही करता है।
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सभी आईआईटी में यह कोर्स चल रहा है। इसमें एक साल तक बेसिक जानकारी के बाद ही बीटेक में दाखिला मिलता है। आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए यह अच्छा विकल्प है।
- मनु पंत, सीईओ, अचीवर्ज क्लासेज