प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ाने की तैयारी है। वीसी की घोषणा के बाद वर्ष 2004 से बनी कमेटियों की सिफारिशों से संबंधित फाइलें खंगालना शुरू कर दी गई हैं। दिसंबर 2013 में गठित रिसोर्स मोबलाइजेशन कमेटी के सदस्यों की बैठक जल्द बुलाने की तैयारी है।
डीएस की अध्यक्षता में बनी यह कमेटी 2004 में तत्कालीन शिक्षा सलाहकार डा. ओपी शर्मा की अध्यक्षता में बनी कमेटी की ओर से 2006 में दी गई सिफारिशों पर मंथन कर रिपोर्ट देगी। इस आधार पर फीस वृद्धि का मसौदा ईसी में मंजूरी को लाया जाएगा।
हो सकता है छात्र संगठनों के विरोध की संभावनाएं देखते हुए विवि पहले परीक्षा शाखा से संबंधित फीस बढ़ाए। उसके बाद डिग्री, डिप्लोमा कोर्सों की बारी आए। इनमें माइग्रेशन, रजिस्ट्रेशन, रिवेल्यूएशन, परीक्षा फार्म फीस शामिल है।
2006 में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली विवि के फीस स्ट्रक्चर का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद कमेटी ने फीस में प्रस्तावित बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था। विवि के वित्त अधिकारी दीवाकर कमल ने माना कि जल्द कमेटी बैठक बुलाई जा रही है।
ये हैं कमेटी के सदस्य
दिसंबर 2013 में डीएस की अध्यक्षता में गठित कमेटी में प्रो. एसएस चौहान, प्रो. सीएल चंदन, प्रो. कैलाश ठाकुर, प्रो. एनएस बिष्ट, परीक्षा नियंत्रक नरेंद्र अवस्थी, कार्यकारी परिषद सदस्य चौधरी वरयाम सिंह बैंस, कुलपति के सचिव प्रो. ओपी चौहान, इक्डोल निदेशक प्रो. कुलवंत राणा और विवि के वित्त अधिकारी दीवाकर कमल शामिल हैं।
फीस बढ़ोतरी ही विकल्प
विवि पर करीब 56 करोड़ से अधिक वित्तीय देनदारी है। हर माह औसतन करीब साढ़े आठ करोड़ के वेतन का संकट दूर करने को दो ही विकल्प हैं। या कुलपति सरकार से 56 करोड़ की अतिरिक्त ग्रांट और वार्षिक बजट में बढ़ोतरी करवाएं या फीसों में बढ़ोतरी करें।