देहरादून ग्राफिक एरा विवि ने केदारनाथ आपदा से प्रभावित इलाकों के ग्रामीणों को आर्किंड की खेती का प्रशिक्षण देने की शुरुआत की है।
अत्याधुनिक टिशू कल्चर तकनीक
इसके लिए यहां एक प्रयोगात्मक कार्यशाला की जा रही है। गांवों के लोगों को से विवि की प्रयोगशाला में आर्किड की पौध तैयार कराकर दी जाएंगी।
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आपदा प्रभावित क्षेत्र गुप्तकाशी के साथ ही पौड़ी के नैनीडांडा ब्लाक के सिमली गांव के लोगों को विवि प्रयोगशाला और ग्रीन हाउस में आयोजित इस कार्यशाला में इस तकनीक से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
गांवों में होगी खुशहाली
विवि के प्रबंधन विभाग से जुड़े सेनि ब्रिगेडियर आरपी नौटियाल इस कार्यशाला के प्रमुख प्रबंधक की भूमिका निभा रहे हैं। ब्रिगेडियर नौटियाल ने बताया कि ग्रामीणों को आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने और गांवों में खुशहाली लाने के लिए आर्किड की खेती की तकनीक सिखाई जा रही हैं।
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विवि की उच्च स्तरीय पादप टिशू कल्चर प्रयोगशाला में सिम्बिडियम आर्किड के साथ ही कारनेशन, गुलदावरी आदि का उत्पादन किया जा चुका है।
बड़े पैमाने पर तैयार कर पौध
इनमें से सिम्बिडियम आर्किड उत्तराखंड हिमालय में पाई जाने वाली प्रजाति है, लेकिन सामान्य तौर पर इसकी पौध तैयार होने में काफी ज्यादा वक्त लगता है।
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इसलिए टिशू कल्चर के जरिए बड़े पैमाने पर पौध तैयार करने का कार्य किया जा रहा है। ब्रिगेडियर नौटियाल ने बताया कि लोगों को आर्किड के वृहद स्तर पर उत्पादन के लिए रोपण, पोषण, कीट संक्रमण से बचाव और बुनियादी ढांचा विकसित करने संबंधी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।