एलयू में अभी तक एग्रीकल्चर फैकल्टी न खुल पाने पर राजभवन ने जवाब तलब किया है। विवि प्रशासन से इस नई फैकल्टी के खोलने में हो रही लेट-लतीफी का कारण पूछा गया है।
विवि प्रशासन अभी तक इस मुद्दे को कार्यपरिषद से पास नहीं करवा पाया है। यही कारण है कि बीते करीब पांच वर्षों से यह मामला लटका हुआ है।
अगर यह नई फैकल्टी बनती तो यूनिवर्सिटी में नए कोर्स शुरू होते और कॉलेजों भी एग्रीकल्चर कोर्स चलाए जाते। मगर अभी तो राजधानी में एकमात्र कॉलेज चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय को भी बॉटनी विभाग से संबद्ध कर चलाया जा रहा है।
एलयू में 2008 में एग्रीकल्चर फैकल्टी खोलने का प्रस्ताव रखा गया था। दरअसल उस साल यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों को संबद्धता देने की परिधि 16 किलोमीटर से बढ़ाकर पूरे जिले तक कर दी थी।
क्योंकि लखनऊ का विस्तार तेजी से हो रहा था और कॉलेज फटाफट खुल रहे थे। यही कारण है कि बख्शी का तालाब क्षेत्र में स्थित चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय को भी एलयू से ही संबद्ध कर दिया गया।
इससे पहले यह कानपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध था। विवि प्रशासन ने उस समय वैकल्पिक व्यवस्था कर कॉलेज को बॉटनी विभाग से संबद्ध कर जल्द नई फैकल्टी खोलने का दावा किया था।
यूनिवर्सिटी के पास सीतापुर रोड स्थित द्वितीय परिसर में इतनी जमीन है कि वहां नई फैकल्टी खोला जा सकता है। मगर विवि प्रशासन ने अभी तक इस पर अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
फिलहाल अब एलयू प्रशासन राजभवन को जवाब देगा। वहीं पिछले महीने उच्च शिक्षा विभाग ने भी विवि प्रशासन के अधिकारियों को बुलाकर बैठक की थी। यूनिवर्सिटी प्रशासन को अब इस काम में तेजी दिखानी ही होगी।