गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) व नोएडा स्थित महामाया प्राविधिक विश्वविद्यालय (एमटीयू) के विलय का आदेश शुक्रवार को कुलपति डॉ. आरके खांडल के पास पहुंच गया।
यानी अब यूपीटीयू फिर अस्तित्व में आ जाएगा। डॉ. खांडल के मुताबिक जल्द ही एक बैठक कर इसके संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि नोएडा स्थित एमटीयू अब उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय के सेकंड कैंपस के रूप में जाना जाएगा। यहां पर पश्चिम उत्तर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज जो कि अभी तक इससे संबद्ध थे उनसे जुड़े काम होंगे।
यहां के स्टूडेंट्स को मार्कशीट, डिग्री आदि से जुड़ी समस्याओं के लिए लखनऊ तक दौड़भाग नहीं करनी होगी। यूपीटीयू के इस सेकंड कैंपस में ही उनके सारे काम हो जाएंगे।
कॉलेजों को संबद्धता देने का काम भी यहीं से निपटाया जाएगा। प्रतिकुलपति प्रो. दिवाकर सिंह यादव ने बताया कि अभी बीच सत्र में दोनों ही यूनिवर्सिटी से जुड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र अपना-अपना कोर्स पढ़ेंगे।
परीक्षा पैटर्न भी वही रहेगा। जो बदलाव करने होंगे वे आगे होंगे। हमारे के लिए स्टूडेंट्स का हित सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि प्रदेश भर में इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कोर्सेज में दाखिले के लिए राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) 2014 में यूपीटीयू के नाम पर आवेदन की संख्या भी बढ़ सकती है।
मालूम हो कि पूर्ववर्ती बसपा सरकार ने 1 मई 2010 को उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय को दो भागों में विभाजित कर जीबीटीयू व एमटीयू बना दिया था। अब सपा सरकार ने इन दोनों का एक में विलय कर दिया है।
इससे प्रदेश भर के करीब 800 से अधिक इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेज सीधे यूपीटीयू से जुड़ जाएंगे।