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तो यूपी बोर्ड परीक्षा में बैठेंगे 20 हजार फर्जी छात्र!

Sun, 16 Feb 2014 09:27 AM IST
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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शैक्षिक सत्र 2013-14 की शुरुआत में माल के चंद्रशेखर आजाद, नन्हें सिंह स्मारक, मलिहाबाद के कुंवर आसिफ अली संजू मिया, आदिल नगर के साकेत इंटर कॉलेज सहित करीब दो दर्जन कॉलेजों में स्थलीय जांच के समय पंजीकरण के मुकाबले आधे से भी कम स्टूडेंट्स मिले थे।
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कॉलेज में फर्जी पंजीकरण मानते हुए नोटिस जारी किया गया। बीते साल शिक्षक संघ ने बगैर मान्यता के चल रहे 351 स्कूलों की सूची जारी की थी।

शिक्षक संघ का दावा था कि ये विद्यालय या तो बगैर मान्यता या फिर आठवीं और 10 वीं तक की मान्यता लेकर इंटरमीडिएट तक की कक्षाएं चला रहे हैं।

तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक उमेश त्रिपाठी ने भी शिक्षक संघ के दावे को माना और उन्होंने 229 विद्यालयों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करवाई थी।

बोर्ड परीक्षाओं में नकल और लेन-देन की सेटिंग के लिए राजधानी में ही करीब 20 हजार फर्जी पंजीकरण हुए हैं। बगैर मान्यता के चल रहे स्कूल अपने यहां पढ़ रहे बच्चों का किसी अन्य मान्यता प्राप्त स्कूल से पंजीकरण कराते हैं।

फिर पास कराने की गारंटी देकर प्रति छात्र से लेनदेन की सेटिंग होती है। राजधानी में यह खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। इस बार भी बोर्ड परीक्षा में करीब 20 हजार फर्जी पंजीकरण वाले स्टूडेंट्स शामिल होंगे।
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इनके खिलाफ कार्रवाई नोटिस जारी होने तक सीमित हो जाती है। सख्त कार्रवाई न होने के कारण हर साल फर्जी स्कूलों की संख्या  बढ़ती जा रही है और हर साल ही हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता जा रहा है।

हाल ही में शताब्दी स्कूल का मामला सामने आया, जिसमें पाया गया था कि आठवीं तक की मान्यता पर 10वीं व 12वीं के फर्जी पंजीकरण कराए गए। राजधानी का यह केवल एक ही मामला नहीं है।

गली-मोहल्लों में चल रहे सैकड़ों स्कूल ऐसे हैं, जो बगैर मान्यता के चल रहे हैं, बच्चों को पढ़ा रहे हैं, फिर उनका फर्जी पंजीकरण कर नकल की सेटिंग कर रहे हैं।

शिक्षक संघ का दावा है कि इस साल बोर्ड परीक्षाओं में 20 हजार फर्जी पंजीकरण वाले स्टूडेंट्स शामिल होंगे। पिछले साल भी बगैर मान्यता के चल रहे स्कूलों के खिलाफ शिक्षक संघ की सूची के आधार पर एफआईआर कराई गई थी।

लेकिन सख्त कार्रवाई न होने के कारण इन पर लगाम नहीं कस पा रही है। ये विद्यालय फर्जी परीक्षार्थियों का पंजीकरण मान्यता प्राप्त वित्तविहीन कॉलेजों में कराते हैं।

इसके बाद बाद परीक्षा केंद्र, कक्ष निरीक्षण ड्यूटी और परीक्षा के दौरान साठ-गांठ कराने के दम पर स्टूडेंट्स को पास कराने का ठेका लेते हैं। इसके एवज में शिक्षा माफिया इन स्टूडेंट्स से हजारों रुपये वसूलते हैं।

इनमें बहुत से स्कूल ऐसे भी हैं जिनके यहां कक्षा आठ या 10वीं की मान्यता है। इसके बावजूद ये अपने यहां हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कक्षाओं में धड़ल्ले से एडमिशन करते हैं।
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