28 दिनों से पीयू के छात्र संगठनों के विरोध को देखते हुए पीयू सीनेट ने फीस बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। शनिवार को पीयू सीनेट की 3 घंटे से अधिक समय तक चली हंगामेदार बैठक में ये फैसला लिया गया।
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फीस बढ़ाने पर मंथन के लिए पीयू कुलपति की ओर से एक हाई पावर कमेटी बनाई जाएगी। जोकि फीस बढ़ोतरी के तरीकों को लेकर नए सिरे से प्रपोजल तैयार करेगी। पीयू सीनेट में दिनभर फीस बढ़ोतरी का मुद्दा ही छाया रहा।
नेताओं और समर्थकों ने मनाया जश्न
उधर सीनेट बैठक में 9 विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस में दर्ज मामले को वापिस लेने को लेकर भी खूब हंगामा हुआ।
सीनेट सदस्यों के आग्रह पर कुलपति प्रो.अरूण कुमार ग्रोवर ने अपने स्तर पर आईजी आरपी उपाध्याय और प्रशासक के सलाहकार केके शर्मा से मुलाकात कर मामला सुलझाने का आश्वासन दिया। शनिवार शाम करीब 5.30 बजे सीनेट के फैसले के बाद प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर 6.30 घंटे से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं और समर्थकों ने जश्न मनाया।
सीनेट में सत्यपाल जैन और पवन बंसल भी पहुंचे
पीयू सीनेट में फीस बढ़ोतरी के मामले में जमकर राजनीति हुई। लोकसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दर मामले में क्रेडिट लेने की होड़ में दिखे।
चंडीगढ़ से लोकसभा के उम्मीदवार पवन कुमार बंसल, एचएस लकी से लेकर बीजेपी नेता सत्यपाल जैन ने भी फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्र हितों में अपनी बात रखी। सत्यपाल जैन ने कहा कि उन्होंने ही सबसे पहले फीस नहीं बढ़ाए जाने की बात कही थी।
सीनेट से पहले जमकर विरोध
पीयू सीनेट से पहले एसएफआई, एसएफएस, सोपू और एनएसयूआई संगठनों के नेता और समर्थकों ने वीसी दफ्तर से प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर तक विरोध रैली निकाली। कैंपस में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
रमिंदर ने खत्म की भूख हड़ताल एसएफएस छात्र नेता रमिंदर सिंह पिछले 11 दिनों से चली आ रही भूख हड़ताल खत्म कर दी। सीनेटर डीपीएस रंधावा ने शाम करीब 6 बजे वीसी दफ्तर के सामने जूस पिलाकर भूख हड़ताल को विराम दिया।
कई सीनेटर ने फीस घटाने का विरोध किया बेशक पीयू सीनेट में 90 फीसदी सदस्य फीस बढ़ोतरी के विरोध में थे, लेकिन कुछ सीनेटर ने छात्रों की मांगों के सामने झुकने को भविष्य के लिए संदेश जाने की बात भी कही।
पीयू सीनेटर शैली वालिया, रुपिंदर तिवारी और केशव मल्होत्रा ने जरुरत के हिसाब से फीस बढ़ाने का समर्थन किया। गुरु गोबिंद सिंह कालेज फॉर वुमन प्रिंसिपल डा.चरणजीत कौर सोही ने कालेजों में आर्थिक तंगी का हवाला दिया।
पीयू में फीस बढ़ोतरी का घटनाक्रम
7 फरवरी 2014 को पीयू प्रशासन ने आर्थिक तंगी को देखते हुए फीस बढ़ोतरी पर मंथन के लिए 21 सदस्यों की कमेटी गठित कर दी।
डीयूआई प्रो.एके भंडारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी में पीयू स्टूडेंट काउंसिल से सिर्फ एक छात्रा जनरल सेक्रेटरी डा.आभा शर्मा को शामिल किया गया। डा.आभा ने बैठक में फीस बढ़ोतरी पर अपनी सहमति दे दी।
फरवरी में हुई पीयू सिंडीकेट ने फैसले पर मुहर लगा दी। स्टूडेंट फॉर सोसाइटी (एसएफएस) ने फैसले के तुरंत बाद वीसी दफ्तर के सामने क्रमिक हड़ताल शुरू कर दी। मंगलवार को पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में विरोध प्रदर्शन करने वालों पर जमकर लाठियां भांजी और 9 विद्यार्थियों के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया गया।
हमें पीयू प्रशासन ने गुमराह किया : प्रो. राजेश गिल
सीनेट में उस समय माहौल तनाव पूर्ण हो गया जब प्रो.राजेश गिल ने कहा कि पीयू कुलपति की ओर से सभी सीनेटर और सिंडीकेट बैठक में विद्यार्थियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर वीसी ने गुमराह किया गया।
इस बयान के बाद पीयू कुलपति भड़क उठे। उधर मामले में डा.अजय रंगा ने भी प्रो.गिल का समर्थन किया। सीनेटर डीपीएस रंधावा और विरेंद्र गिल ने पीयू सीनेट में पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकार्डिंग दिखाई और कहा कि विद्यार्थियों ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे उनके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया जाए।
इस धरने ने पीयू में एक नया ट्रेंड सेट किया है। अब पीयू प्रशासन विद्यार्थियों से सुझाव या उन्हें कांफीडेंस में लिए बिना छात्र हितों से जुड़ा फैसला नहीं लेगी। भविष्य में भी अगर पीयू ऐसा कोई कदम उठाती है तो सभी छात्र संगठन एकमंच पर एकजुट होंगे। प्रभप्रीत सिंह (छात्र नेता एसएफआई)
यह पूरी तरह से विद्यार्थियों की जीत है। फीस बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब विद्यार्थियों पर पड़ता। फीस बढ़ाने या रेविन्यू जनरेट करने के लिए पीयू अब कमेटी में छात्र नेताओं और युवा सीनेटर से भी सुझाव लेने का आश्वासन दिया है। विरेंद्र सिंह गिल (पीयू युवा सीनेटर)
फीस बढ़ाना और पीयू कैंपस के अंदर विद्यार्थियों पर बर्बरता से लाठीचार्ज करना बिल्कुल सही नहीं है। पूरी सीनेट ने इस मामले की निंदा की है। जिन विद्यार्थियों के खिलाफ केस दर्ज हुए हैं, उन्हें वापिस कराया जाएगा। डीपीएस रंधावा (पीयू युवा सीनेटर)