हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के संचालन में आ रही दिक्कतों के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही और लंबे अर्से से विवि की परीक्षा विंग में स्टाफ की कमी जिम्मेदार है। दो साल से विवि के परीक्षा विंग के मुखिया सीओई तक के पद पर कामचलाऊ व्यवस्था है। काम की अतिरिक्त जिम्मेदारी एक विभाग के शिक्षक को सौंपी है। अतिरिक्त परीक्षा नियंत्रक का पद भी रिक्त है। आठ सेक्शन आफिसर, तीन सहायक कुलसचिव तक के पद रिक्त पड़े हैं।
यही नहीं निचले स्तर पर पीजी, यूजी और डिग्री डिप्लोमा कोर्स की शाखाओं में भी करीब 30 सहायकों और 25 क्लर्कों की दरकार है। कर्मचारियों की कमी होने से हर बार परीक्षाओं के न तो समय से रोलनंबर भेजे जा रहे हैं न ही परीक्षा परिणाम समय से निकल पा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार की इस लापरवाही का खामियाजा विवि से कोर्स कर रहे लाखों छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
परीक्षा विंग की विभिन्न शाखाओं में कार्यरत कर्मचारी और अधिकारी काम का अतिरिक्त बोझ झेल रहे हैं। एक-एक एसओ के पास तीन-तीन कक्षाओं की जिम्मेदारी है। ऐसे में समय से रोलनंबर जारी होने और परिणाम घोषित होने की उम्मीद करना बेमानी है। विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया इतनी धीमी चल रही है कि शायद ही आने वाले साल में इन शाखाओं को पर्याप्त स्टाफ नसीब हो सके।
पीजी में 35 हजार, यूजी में सवा लाख छात्र
विवि से वर्तमान में यूजी कोर्स में करीब सवा लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। पीजी डिग्री कोर्स में 30 से 35 हजार, इसके अलावा बीबीए, बीसीए और अन्य डिग्री डिप्लोमा कोर्स में करीब 25 हजार से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
ये है कर्मचारी छात्र अनुपात- एचपीयू की परीक्षा विंग के लिए तय छात्र-कर्मी अनुपात के मुताबिक 4000 छात्रों पर दो सहायक और एक क्लर्क अनिवार्य है। एक सेक्शन के ऊपर एक अनुभाग अधिकारी होना चाहिए। विवि की मौजूदा स्थिति यह है कि एक एसओ तीन-तीन ब्रांच को डील कर रहा है। निचले स्तर के कर्मियों की कमी से विंग में प्राथमिकता वाले कार्य तय कर काम चलाना पड़ रहा है। इससे देरी होना स्वाभाविक है।
जल्द भर्ती करने के हैं प्रयास- एचपीयू के प्रतिकुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान ने माना कि स्टाफ की कमी है। बावजूद इसके उपलब्ध स्टाफ के माध्यम से ही छात्रों को सेवाएं दी जा रही हैं। सीओई सहित निचले स्तर के स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है। जल्द से जल्द इसे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
एचपीयू विकलांगों के लिए बनाएगा वेबपोर्टल
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय मूक बधिर, दृष्टिहीन और किसी भी तरह की विकलांगता से ग्रसित छात्रों की सुविधा के लिए वेब पोर्टल लांच करेगा। बीस लाख चालीस हजार से यह पोर्टल तैयार होगा। पोर्टल को बनाने का कार्य नेशनल इन्फार्मेटिक सेंटर को सौंपा है। यह जानकारी विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने दी। उन्होंने कहा कि पोर्टल छात्रों की सुविधा के लिए हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध होगा। विश्वविद्यालय की वेबसाइट का इस्तेमाल विकलांग छात्र न के बराबर ही कर पा रहे थे।
उनकी जरूरत के हिसाब से वेबसाइट में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। उनकी जरूरतों को देखते हुए ही यह पोर्टल तैयार किया जा रहा है। केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की एक योजना के तहत वेबसाइट के स्थान पर वेब पोर्टल बनाने के लिए 20 लाख रुपये का विशेष अनुदान विवि को प्राप्त हुआ।
अगले वर्ष मार्च तक होगा लांच
विवि का नया पोर्टल www.hpuniv.ac.in अगले वर्ष मार्च तक लांच हो जाएगा। इससे विवि की 35 और उप वेबसाइटें भी जुड़ी रहेंगी। इसके लिए विवि के वरिष्ठ शिक्षकों की एक निगरानी समिति बनाई है। यह इस कार्य को समय से पूरा किया जाना और लांच किया जाना सुनिश्चित करेगी। नये वेब पोर्टल को अब दृष्टिहीन, मूकबधिर एवं हाथ से विकलांग लोगों को विवि से संबंधित सूचनाएं लेने में बहुत आसानी होगी क्योंकि वेब पोर्टल को बिना माउस की सहायता से सिर्फ कीबोर्ड के जरिये चलाया जा सकेगा।
अल्पदृष्टि लोगों की सुविधाओं के लिए वेब पेज पर लिखे निर्देशों में कलर कंट्रास्ट ये वेबपोर्टल मोबाइल से भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसमें दिए चित्रों का लिखित ब्यौरा उपलब्ध होने से दृष्टिहीन लोगों को विशेष लाभ होगा। सभी ऑडियो, विजुअल सामग्री का लिखित ब्यौरा भी दिया जाएगा। विवि की हर शाखा विभाग की अपनी उप वेबसाइट होगी जिस पर वे स्वयं अपनी सामग्री अपलोड कर सकेंगे। यह पहला अवसर है कि विवि की सूचनाएं इंटरनेट पर हिंदी में भी उपलब्ध होंगी।